पुलिस ने बिथरी थाने में लल्ला गद्दी और सद्दाम के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इसकी जांच एसआईटी कर रही है। उधर, जेल में अशरफ से अवैध तरीके से मुलाकात कराने के मामले में जेलर और डिप्टी जेलर समेत सात निलंबित हो चुके हैं। दोस्त भाइयों के साथ कई लोग गिरफ्तार भी हो चुके हैं।
उमेश पाल की हत्या की योजना साबरमती जेल गुजरात और बरेली की जिला जेल में बनाई गई थी। 11 फरवरी को नौ लोगों ने यहां बंद पूर्व विधायक खालिद अजीम उर्फ अशरफ से मुलाकात की थी। हालांकि, यहां के अधिकारी लगातार इस बात से इंकार कर रहे थे।
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मीडिया रिपोर्ट्स और प्रयागराज से मिले इनपुट के आधार पर तत्कालीन एसएसपी अखिलेश चौरसिया ने सीओ थ्री के नेतृत्व में एसआईटी गठित कर मामले की जांच शुरू कराई तो मामला परत दर परत खुलता चला गया।
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जेल के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज लेकर एसआईटी उन लोगों को चिह्नित करने में जुटी है, जो अशरफ से मिलने आते थे। खासतौर से योजना को अंतिम रूप देने के लिए 11 फरवरी को होने वाली मुलाकात अहम है। इस दिन नौ लोगों ने अशरफ से मुलाकात की थी। फुटेज को बरेली पुलिस के साथ ही प्रयागराज पुलिस को भी भेजकर पता कराया गया।
जांच में जिन लोगों के चेहरे पहचान में आए हैं, उनमें अतीक का बेटा असद शामिल है जो उमेश की हत्या करने वाले शूटरों के गैंग की अगुवाई कर रहा था। साथ ही उस्मान उर्फ विजय चौधरी, अरमान और गुलाम के नाम शामिल हैं।
जेल अधिकारियों और कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की जा रही है। बृहस्पतिवार को जिला जेल में पहुंचकर एसआईटी ने फिर जांच की। जेल अधीक्षक पर भी कार्रवाई तय मानी जा रही है। उनके खिलाफ कुछ और साक्ष्य टीम को मिले हैं। हालांकि वह खुद को पाक-साफ दिखाने की कोशिश में लगे हैं और शिवहरि व मनोज गौड़ जैसे छोटे कर्मचारियों पर ही सारा ठीकरा फोड़ रहे हैं।