इन सभी पर आरोप है कि उन्होंने जेल के नियमों की अनदेखी कर अशरफ को वीआईपी ट्रीटमेंट दिया। अशरफ को जेल में सहूलियत देने मामले में अब यह सभी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं। दरअसल, प्रयागराज की घटना में बरेली जेल में बंद अशरफ की भूमिका पता लगने के बाद जेल में उसके नेटवर्क का खुलासा हुआ है। उमेश पाल हत्याकांड में अशरफ नामजद है।
मुलाकाती रोजाना 35 से 40, नाम सिर्फ एक
डीआईजी जेल आरएन पांडेय की जांच में पता चला कि अशरफ से 11 फरवरी से पहले और बाद में कई दिनों तक 35 ले 40 लोग मिलने आते थे। मुलाकात के रजिस्टर में केवल एक व्यक्ति का नाम दर्ज होता था। इनमें से कितने परिजन और गैंग के सदस्य थे, इसकी जांच बरेली और प्रयागराज पुलिस करेगी। बरेली जेल के दस्तावेजों में भी गड़बड़ी मिली है। डीआईजी ने अशरफ की निगरानी बढ़ाने और जेल में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कई सुझाव भी दिए हैं।
बरेली रेंज के आईजी डॉ. राकेश कुमार सिंह ने बताया कि बरेली जिला जेल में बंदी अशरफ को मिल रही सुविधा को लेकर जेल विभाग अलग से जांच कर रहा था। उस मामले में कार्रवाई जेल विभाग की ओर से की गई है। एसआईटी ने अशरफ से संबंध साबित होने पर जेल वार्डर समेत दो आरोपियों को जेल भेजा है। दोषियों पर कार्रवाई जारी रहेगी।