बरेली। भ्रूण की जांच रोकने के लिए बड़े स्तर पर चल रही निगरानी के बावजूद सीएमओ कार्यालय में अल्ट्रासाउंड सेंटर के पंजीकरण में खूब खेल हो रहा है। पिछले दिनों हुई जांच में नियमों को दरकिनार कर अल्ट्रासाउंड सेंटर के पंजीकरण की आशंका जताई गई थी। कहा गया था कि दूसरे जिलों के एक ही रेडियोलॉजिस्ट के नाम से बरेली में दो-दो अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित हो रहे हैं। हालांकि, अफसर जांच से पल्ला झाड़ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक बरेली में 25 रेडियोलॉजिस्ट के नाम पर चल जिले में चल रहे 49 अल्ट्रासाउंड सेंटर की सूची बनाकर जांच की जा रही है। आजमगढ़, बिजनौर, वाराणसी, कानपुर, मेरठ के रेडियोलॉजिस्ट के नाम से दो-दो अल्ट्रासाउंड सेंटर का पंजीकरण होने की जानकारी मिली है। स्वास्थ्य विभाग ने इनके पंजीकरण बगैर किसी पूछताछ के ही कर दिए हैं। इसमें बड़ा गोलमाल होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।
नियमानुसार पंजीकरण के दौरान यह जानकारी लेनी जरूरी कि संबंधित रेडियोलॉजिस्ट के नाम से पूर्व में कोई अल्ट्रासाउंड सेंटर पंजीकृत है या नहीं। बीते दिनों मेरठ के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. एपी जेम्स पार्सिसंस के नाम पर चल रहे 28 अल्ट्रासाउंड सेंटरों का खुलासा हुआ था। हालांकि, उनके नाम से पंजीकृत अल्ट्रासाउंड सेंटरों को बंद करा दिया गया है और मुकदमा भी दर्ज कराने के लिए रिपोर्ट भेज दी गई है। अब जांच में अन्य जिले के 25 रेडियोलॉजिस्ट के नाम से चल रहे 49 अल्ट्रासाउंड सेंटरों का पंजीकरण संदिग्ध मिला है। सीएमओ ने जांच के निर्देश दिए हैं।
इन रेडियोलॉजिस्ट के नाम की हो रही पड़ताल
डॉ. एपी जेम्स पार्सिसंस के अलावा डॉ. एमके वार्ष्णेय, डॉ. रफीक अहमद, डॉ. जमशेद रईस, डॉ. आलोक गुप्ता के नाम पर बरेली में सेंटर चल रहे हैं। इसके अलावा इन्हीं के नाम से दूसरे जिलों में भी सेंटर संचालित होने की आशंका है। डॉ. आलोक गुप्ता, डॉ. मोहम्मद असलम, डॉ. आरिफ रसूल, डॉ. ब्रज किशोर, डॉ. आरके मिश्रा, डॉ. प्रमोद, डॉ. रौनक, डॉ. दीपांशु, डॉ. मधु के नाम से चल रहे सेंटरों की भी जांच हो रही है। सीएमओ डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि अवैध संचालित सेंटरों की जांच की जा रही है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।