उर्स-ए-आला हजरत पर इस बार खास तौर पर आयोजित ‘तदबीर फलाहो नजात’ कॉन्फ्रेंस में उर्स के दूसरे रोज यानी 14 नवंबर को उलमा इस्लाम और मुस्लिमों से संबंधित मुद्दों को रखेंगे। प्रमुख मुद्दों पर 1910 में दिए आला हजरत के सुझावों पर चर्चा करते हुए अमल दरामद की रणनीति भी बनाई जाएगी।
दरगाह के प्रवक्ता मुफ्ती मोहम्मद सलीम नूरी का कहना है कि 1910 में मुसलमानों के लिए आजमाइश का दौर था। अंग्रेज और दूसरी इस्लामी विरोधी ताकतें दुश्मन बनी हुईं थीं। मजहब और मुसलमानों के खिलाफ प्रोपेगंडा किया जा रहा था। मुस्लिम पर्सनल लॉ पर एतराज उठ रहे थे। तब आला हजरत ने लाहौर में अंजुमन नोमानिया का गठन कर सुझाव के तौर पर 10 बिंदु लिखकर दिए और अमल करने को कहा, किताब भी लिखी। उन्हीं दस बिंदुओं और किताबों के हवाले से उनके सुझावों को दोहराया जाएगा। अमली जामा पहनाने की रणनीति पर भी विचार-विमर्श होगा।
उन्होंने बताया कि आला हजरत के दस बिंदुओं में मदरसा खोलने, बच्चों के पढ़ाने के लिए स्कॉलरशिप, पढ़ाने वालों को अच्छी तनख्वाह, पढ़ने वाले बच्चों की मनोदशा को समझकर उन्हें आगे बढ़ाने, शरीयत से संबंधित किताबों को छपवाना-बांटना, जहां भी इस्लाम के उसूलों और पर्सनल लॉ पर उंगली उठ रही हो वहां हैंडबिल बांटने आदि सुझाव शामिल हैं।