पुलिस पर लगा यह आरोप
पीड़ित किशोरी ने बताया कि आरोपी उसे कमरे में बंदकर रखता था। मारपीट करने के साथ वह दुष्कर्म भी करता था। करीब डेढ़ महीने बाद पुलिस उसे खोजकर लाई। आरोप है कि दरोगा ने दबाव बनाकर कोर्ट में आरोपियों के पक्ष में बयान दिलवा दिए। इसके बाद मुकदमा खत्म कर दिया गया।
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मामले में फरीदपुर इंस्पेक्टर दया शंकर ने बताया कि युवती लड़की बालिग है। कोर्ट में बयान दर्ज कराने के बाद ही मुकदमा खत्म किया गया था। दरोगा पर लगाए गए आरोप गलत हैं। उधर, परिजनों का दावा है कि पीड़िता नाबालिग है।