15 के बजाय चार एलटी संभाल रहे सैंपलिंग का जिम्मा, एएलटी की घटी तादाद
बरेली। दूसरे राज्यों में कोरोना संक्रमण के मामले फिर से बढ़ने लगे हैं, लेकिन बरेली में अभी राहत है। हालांकि संवेदनशील राज्यों से आवाजाही शुरू होने और स्कूल खुलने के फैसले के बाद यहां भी संक्रमण के मामले बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उधर, स्वास्थ्य विभाग के अफसर चार माह पहले तैनात रहे स्टाफ में से अब सिर्फ चौथाई स्टाफ की उपलब्धता के भरोसे ही तीसरी लहर से मुकाबले की कोशिश कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक चार माह पहले संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान स्वास्थ्य विभाग के पास स्थायी, अस्थायी समेत संविदा पर काफी कर्मचारी तैनात थे। ट्रैक, ट्रेस का फार्मूला तेजी से फॉलो करने का नतीजा था कि करीब माह भर में ही संक्रमण के मामले 16 सौ से घटकर 10 के भीतर सिमट गए। उस दौरान सैंपलिंग के लिए एमएमयू के अलावा करीब 15 एलटी, 18 सहायक कार्यरत थे, लेकिन अब चार एलटी और छह सहायक के भरोसे काम चल रहा है। एलटी की तादाद कम होने से स्टेटिक टीमों की संख्या भी कम हो गई है।
बताते हैं कि यही वजह है कि अब चरणवार सैंपलिंग नहीं हो पा रही है। टोल प्लाजा, जंक्शन और बस अड्डों पर पहले दो से तीन शिफ्ट में लोगों के सैंपल होते थे, लेकिन अब एक शिफ्ट में ही सैंपल लिए जा रहे हैं। दिल्ली और मुंबई से आने वाले लोगों की जांच के लिए टीम रेलवे जंक्शन, बस अड्डों पर शेड्यूल के तहत कार्य कर रही हैं। टोल प्लाजा पर सुबह दस से दोपहर दो बजे तक ही सैंपल हो रहे हैं, जबकि यहां पहले सुबह से रात नौ बजे तक जांच होती थी।
बड़े पैमाने पर हटाया गया स्टाफ
कोरोना की दूसरी लहर शुरू होने पर बड़ी तादाद में स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर भर्तियां की गई थीं। दूसरी लहर थमने के बाद जून में सभी संविदा कर्मचारियों को कार्यमुक्त कर दिया गया है। सीएचसी, पीएचसी, यूपीएचसी से बुलाए गए एलटी, नर्स, सहायक कर्मचारियों को भी वापस उनके तैनाती स्थल पर भेज दिया गया है। लिहाजा तीन सौ बेड कोविड अस्पताल में सफाई समेत अन्य व्यवस्थाएं संभालना मुश्किल हो रहा है।
दूसरे राज्यों में जाने वालों की सैंपलिंग ज्यादा
बताते हैं कि अब जो सैंपल हो रहे हैं, उनमें से करीब 40 फीसदी सैंपल उत्तराखंड, दिल्ली, मुंबई, गुजरात, चंडीगढ़ के अलावा धार्मिक स्थलों पर जाने वाले लोगों के हैं। चार माह पहले प्रतिदिन करीब सात हजार सैंपल होते थे, जो अब घटकर चार हजार रह गए हैं। सैंपलिंग में कमी के मुद्दे को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया तो अब स्वास्थ्य विभाग सैंपलिंग बढ़ाने में जुटा है। अब करीब पांच हजार सैंपल प्रतिदिन हो रहे हैं।
शासन से बाल रोग विशेषज्ञों की तैैनाती का इंतजार
तीसरी लहर में बच्चों के संक्रमित होने की आशंका के चलते शासन ने मुकाबले के लिए बड़े पैमाने पर तैयारी करने के निर्देश दिए थे। बिथरी के अलावा सभी सीएचसी में दस बेड के कोरोना वार्ड बनकर तैयार हो चुके हैं। बहेड़ी, मीरगंज, आंवला और तीन सौ बेड कोविड अस्पताल में पीकू वार्ड बन चुका है। उपकरण भी लग रहे हैं, लेकिन अब तक 15 बाल रोग विशेषज्ञों की तैनाती नहीं हो सकी है। शासन को कई बार पत्र भी लिखा जा चुका है।
हमारी सभी टीमें सक्रिय हैं। सैंपलिंग भी अब बढ़ गई है। दिल्ली, मुंबई आदि संवेदनशील राज्यों से आने वालों की प्राथमिकता पर जांच कराई जा रही है। बाल रोग विशेषज्ञों की तैनाती के लिए सीएमओ ने शासन को पत्र लिखा है। जरूरत पड़ने पर उच्चाधिकारियों के सहयोग से स्टाफ तैनात किया जाएगा। - डॉ. अशोक कुमार, एसीएमओ, जिला सर्विलांस अधिकारी।