बरेली। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) की पीलीभीत बाईपास रोड स्थित जमीन पर दिन प्रति दिन अवैध कब्जे हो रहे हैं। अतिक्रमण हटाने के नाम पर कब्जेदारों को केवल नोटिस भेजे जा रहे हैं। किसी भी नोटिस का जवाब नहीं मिल रहा। इतना ही नहीं, प्रशासन को भी अतिक्रमण हटवाने के लिए लेटर पर लेटर लिखे गए लेकिन जवाब नहीं आ रहा है। अतिक्रमण हटाने के नाम पर फाइल जरूर मोटी हो रही है लेकिन कब्जेदारों की संख्या बढ़ती जा रही है।
एनएचएआई की ओर से सुशील कुमार को खोखा रखने, गणेश बिल्डिंग स्टोर को सड़क के किनारे की जमीन पर समान फैलाने, जगन्नाथ और सुमित दिवाकर को अस्थायी निर्माण कराकर ढाबा चलाने, रोहित मौर्य को रेता बजरी के ढेर लगाने, मोडिनोबल हास्पिटल को अनाधिकृत कमरे का निर्माण करने, जान मोहम्मद, अरुण कुमार और रजा मार्बल को पत्थर डंप करने, दयाराम, दौलतराम और मोहम्मद जमशेद को नर्सरी चलाने, अनंजा बिल्डिंग मैटेरियल और मुकेश कुमार को बालू गिट्टी फैलाने, मस्जिद के पीछे इंडियन सेनेट्री स्टोर को संगमरमर के पत्थर लगाने, बीसलपुर चौराहा से आगे कनौजिया सीमेंट स्टोर को बालू चंबल डालने, आदिल मुस्तफ को अनाधिकृत तरीके से टीन शेड डालने, मुस्कान ट्रेडर्स को हाइवे की जमीन पर पत्थर लगाने, चंदा इंटरप्राइजेज को सामान डंप करने, दीपक को बीसलपुर चौराहे पर पराग मिल्क बूथ खोलने, गंगाशील महाविद्यालय को रिठौरा से आगे सड़क के पहुंच मार्ग पर पत्थर बिछाने, एलएन त्रिपाठी को अवैध रूप से अंडरग्राउंड केबिल डालने पर जुलाई से दिसंबर 2015 को अलग-अलग तारीखों में नोटिस भेजे गए। इन दुकानदारों को एक हफ्ते में अतिक्रमण खुद हटाने का समय दिया गया था। नौ जुलाई 2015 को एनएचएआई ने एसडीएम सदर को सेटेलाइट से बड़ा बाईपास तक अतिक्रमण हटाने के लिए पत्र लिखा। इससे पहले प्रशासन को 11 से ज्यादा पत्र अतिक्रमण हटाने के लिए भेजे गए लेकिन प्रशासन ने इस पर अब तक निर्णय नहीं लिया।
‘हमने दो दर्जन से ज्यादा अतिक्रमण करने वाले चिह्नित कर उनको नोटिस छह महीने पहले भेजे थे। इसके बाद ध्वस्तीकरण कराया जाना था। प्रशासन, बीडीए और नगर निगम को दर्जनों पत्र लिखे जा चुके हैं। हमें मजिस्ट्रेट और फोर्स मिलने का इंतजार है।’ कर्नल आरएस पुरी, प्रोजेक्ट मैनेजर एनएचएआई