बरेली। 54 सौ क्विंटल लकड़ियों से शहर की सर्दी दूर होगी। नगर निगम ने इसके लिए टेंडर तो कर दिया है, लेकिन इसमें झोल ही झोल नजर आ रहे हैं। वहीं, नगर निगम की सूची से इस बार तीन रैन बसेरे भी गायब हो गए हैं। ऐसे में इस बार व्यवस्था डांवाडोल नजर आ रही है।
पुरानी फर्म से विवाद की वजह से इस बार नाला सफाई करने वाली फर्म इम्तियाज को लकड़ियों की आपूर्ति का टेंडर दे दिया गया। इस फर्म के पास लकड़ियों की आपूर्ति का कोई अनुभव नहीं। बाजार में जहां 1,200 रुपये प्रति क्विंटल का रेट चल रहा है, वहीं टेंडर 735 रुपये की दर से दिया गया है। चर्चा यह भी है कि कम रेट की भरपाई मात्रा घटाकर की जाएगी। यानी, लकड़ियां कम मात्रा में डाली जाएंगी। इसमें सांठगांठ की बात भी सामने आ रही है। इस मामले में पक्ष जानने के लिए नगर निगम के मुख्य अभियंता को कॉल की गई, पर उन्होंने रिसीव नहीं की।
दूसरी ओर, निगम ने इस बार सात स्थायी और चार अस्थायी रैन बसेरों की सूची जारी की है। इसमें हजियापुर के दो स्थायी रैन बसेरों का जिक्र नहीं है। मथुरापुर सामुदायिक केंद्र का अस्थायी रैन बसेरा भी सूची से गायब है। अफसरों का तर्क है कि इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। इसके बदले दूसरे रैन बसेरों में व्यवस्थाएं बढ़ाई जा रही हैं।
यहां बने हैं स्थायी रैन बसेरे
बाकरगंज, सैदपुर हॉकिंस, बदायूं रोड, पटेल चौक, हरूनगला, छोटी विहार, प्रेमनगर।
अस्थायी रैन बसेरे
चौपुला चौराहा, पुराना रोडवेज, सेटेलाइट, डेलापीर।
टेंडर में अनियमितता पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। टेंडर प्रक्रिया में कम रेट वाले को ही चुना जाता है, लेकिन अलाव को लेकर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। - संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त
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