वर्ष 2014 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने कर दी थी पत्नी और दो मासूम बच्चों की हत्या
शनिवार को मृतका के चाचा ने दर्ज कराए बयान, अब 16 नवंबर को होगी सुनवाई
बरेली। किला के मोहल्ला रफियाबाद में 22 जनवरी, 2014 को 30 वर्षीय अपर्णा, उनकी तीन वर्षीय बेटी समृद्धि और डेढ़ वर्षीय बेटा शुभांक की दिनदहाड़े घर में धारदार हथियारों से हत्या कर दी गई थी। इस मामले का मुख्य आरोपी अपर्णा का पति अंकुर मिश्रा तब से ही जेल में है लेकिन पुलिस न तो आला कत्ल बरामद कर सकी और न ही उससे हत्या करने की बात कबूल करा सकी। फिलहाल कोर्ट में मामले की सुनवाई जारी है। शनिवार को अपर्णा के चाचा अखिलेश चंद्र मिश्रा ने स्पेशल जज एससी/एसटी एक्ट सत्यदेव गुप्ता की अदालत में अपने बयान दर्ज कराए। इस मामले में अगली सुनवाई अब 16 नवंबर को होगी।
इस घटना की रिपोर्ट अपर्णा की मां सुमन ने दर्ज कराई थी। सुमन का कहना था कि जब वह घर पहुंचीं तो उनकी बेटी अपर्णा और उसके दोनों बच्चों के खून से लथपथ शव कमरे में पड़े थे। तीनों की धारदार हथियार से गला काटकर हत्या की गई थी। उनका आरोप था कि दामाद अंकुर उनकी बेटी को मायके से रुपये लाने के लिए प्रताड़ित करता था। मुकदमे में अंकुर के अलावा उसके पिता रामप्रकाश मिश्रा, मां मृदुला मिश्रा, भाई मिलन मिश्रा, बहन राखी और बहनोई मोनू को भी आरोपी बनाया गया था। इसमें दहेज हत्या और हत्या समेत कई अन्य धाराएं लगाई गई थीं। हालांकि अंकुर ने कहा था कि बदमाशों ने उसकी पत्नी और बच्चों की हत्या की है। मगर मुकदमे के आधार पर ही पुलिस ने अंकुर को घटना के बाद गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मगर उसने न तो हत्या करना कबूल किया और न ही पुलिस आला कत्ल बरामद कर सकी। पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर अंकुर तभी से जेल में है।
पुलिस ने दो नाम निकाले तो कोर्ट से हुए तलब
इस मामले में पुलिस ने अंकुर की बहन राखी और बहनोई मोनू के नाम मुकदमे से निकालकर चार अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी। मगर कोर्ट में गवाहों के बयान के आधार पर दोनों को तलब कर लिया गया। इसके बाद दोबारा गवाही की प्रक्रिया शुरू हुई है। अंकुर के अधिवक्ता वेंकटेश्वर सक्सेना ने बताया कि शनिवार को अपर्णा के चाचा अखिलेश चंद्र मिश्रा ने कोर्ट में अपने बयान दर्ज कराए हैं। अब इस मामले में सुनवाई के लिए अगली तारीख 16 नवंबर तय की गई है।