बिथरी में नहीं बनी बात तो चले गए बदायूं
सूत्रों के मुताबिक भूरे और राजवीर यादव को हल्के मामले में हाजिर कराने के लिए सात लाख रुपये खर्च किए गए। इस रकम का कई जगह बंटवारा हुआ। ऑफर बिथरी पुलिस के पास भी आया था, पर अफसरों के दबाव की वजह से किसी ने खेल करने की हिम्मत नहीं जुटाई। आरोपियों को एनकाउंटर का डर भी सता रहा था। जो भी पैरवी में कॉल करता, बिथरी पुलिस उसे उठा लेती थी। इसलिए आरोपियों ने बदायूं का रुख किया।
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पहले भी लग चुके हैं हत्यारोपियों की सरपरस्ती के आरोप
बदायूं में हत्यारोपियों को तमंचे के साथ जेल भेजने वाली पुलिस कई सवालों के घेरे में है। प्रभारी निरीक्षक भले ही अपने आप को निर्दोष बता रहे हैं, लेकिन उन्होंने भी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। गिरफ्तारी के बाद दोनों हत्यारोपियों का आपराधिक इतिहास क्यों नहीं खंगाला गया, यह बड़ा सवाल है। कोई इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं है कि प्रभारी निरीक्षक की जानकारी के बिना चौकी इंचार्ज ने इतना बड़ा खेल किया होगा। फिलहाल एसएसपी ने पूरे मामले की जांच सीओ उझानी को सौंप दी है।
मामला बरेली से जुड़ा न होता और एडीजी-आईजी के संज्ञान में न आता तो दबकर रह जाता। सिविल लाइंस इंस्पेक्टर मनोज कुमार पर पहले भी हत्यारोपियों की सरपरस्ती के आरोप लग चुके हैं। उझानी थाने में तैनाती के दौरान उनके खिलाफ कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज हुई थी। इस मामले की जांच पूरी भी नहीं हो पाई कि नया मामला सामने आ गया। सवाल यह है कि दोनों हत्यारोपियों को जेल भेजने के लिए तमंचे कहां से लाए गए? जांच में यह भी साफ हो जाएगा।
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आईजी डॉ. राकेश सिंह ने बताया कि बिथरी में हत्या कर भागे आरोपियों को हथियार बरामदगी में जेल भेजने के मामले में चौकी प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। बदायूं एसएसपी को निर्देश दिया गया है कि सिविल लाइंस थाना प्रभारी व अन्य संभावित लोगों की भूमिका की भी जांच करा ली जाए। जो दोषी मिलेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।