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नन्हेबाबू हत्याकांड: बदायूं के सिविल लाइंस इंस्पेक्टर पर लटकी कार्रवाई की तलवार, आईजी ने दिया ये आदेश

Fri, 06 Dec 2024 03:12 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं

सार

Bareilly News: बरेली के नन्हेबाबू की हत्या के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी में खेल करने पर बदायूं के सिविल लाइंस थाने के पुलिसकर्मी फंस गए हैं। हत्यारोपियों की गिरफ्तारी तमंचा रखने के मामले में चार पुलिसकर्मी निलंबित हो चुके हैं। अब इंस्पेक्टर पर भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है। 
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बदायूं में पुलिस ने गिरफ्तार किए थे दोनों आरोपी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली के बिथरी चैनपुर के नन्हेबाबू की हत्या के मामले में बदायूं की सिविल लाइंस पुलिस के खेल पर चार पुलिसकर्मियों का निलंबन कर फौरी कार्रवाई कर दी गई। अब इंस्पेक्टर मनोज कुमार सिंह पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। वह आंवला में तैनाती के दौरान भी काफी चर्चित रहे। विपक्षी दल के सजातीय नेता, कानूनी राय देने वाले वकील के मुंशी समेत अन्य लोगों का भी कार्रवाई के दायरे में आना लगभग तय है। आईजी ने बदायूं के एसएसपी को मामले की विस्तृत जांच का आदेश दिया है।

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27 नवंबर को गोली मारकर नन्हे बाबू की हत्या कर दी गई थी। आरोपी भूरे यादव और राजवीर यादव फरार चल रहे थे। बिथरी पुलिस ने उनके करीबी पिंटू यादव को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो पता लगा कि दोनों भाइयों ने सजातीय नेता, बदायूं के सिविल लाइंस थाने की मंडी चौकी के सजातीय पुलिसकर्मियों व बदायूं के बिल्सी निवासी वकील के मुंशी के जरिये योजना बनाकर खेल किया है।

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दोनों को बदायूं में तमंचा बरामदगी दिखाकर जेल भेज दिया गया। जांच में पता लगा है कि इसके पीछे आरोपियों को कोर्ट में साफ बचाने की योजना थी। बरामद असलहे भी बदले जाने का अंदेशा है। अब बिथरी थाना पुलिस इसका तोड़ निकालने में जुटी है। 

बिथरी में नहीं बनी बात तो चले गए बदायूं 
सूत्रों के मुताबिक भूरे और राजवीर यादव को हल्के मामले में हाजिर कराने के लिए सात लाख रुपये खर्च किए गए। इस रकम का कई जगह बंटवारा हुआ। ऑफर बिथरी पुलिस के पास भी आया था, पर अफसरों के दबाव की वजह से किसी ने खेल करने की हिम्मत नहीं जुटाई। आरोपियों को एनकाउंटर का डर भी सता रहा था। जो भी पैरवी में कॉल करता, बिथरी पुलिस उसे उठा लेती थी। इसलिए आरोपियों ने बदायूं का रुख किया।

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पहले भी लग चुके हैं हत्यारोपियों की सरपरस्ती के आरोप
बदायूं में हत्यारोपियों को तमंचे के साथ जेल भेजने वाली पुलिस कई सवालों के घेरे में है। प्रभारी निरीक्षक भले ही अपने आप को निर्दोष बता रहे हैं, लेकिन उन्होंने भी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। गिरफ्तारी के बाद दोनों हत्यारोपियों का आपराधिक इतिहास क्यों नहीं खंगाला गया, यह बड़ा सवाल है। कोई इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं है कि प्रभारी निरीक्षक की जानकारी के बिना चौकी इंचार्ज ने इतना बड़ा खेल किया होगा। फिलहाल एसएसपी ने पूरे मामले की जांच सीओ उझानी को सौंप दी है। 
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मामला बरेली से जुड़ा न होता और एडीजी-आईजी के संज्ञान में न आता तो दबकर रह जाता। सिविल लाइंस इंस्पेक्टर मनोज कुमार पर पहले भी हत्यारोपियों की सरपरस्ती के आरोप लग चुके हैं। उझानी थाने में तैनाती के दौरान उनके खिलाफ कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज हुई थी। इस मामले की जांच पूरी भी नहीं हो पाई कि नया मामला सामने आ गया। सवाल यह है कि दोनों हत्यारोपियों को जेल भेजने के लिए तमंचे कहां से लाए गए? जांच में यह भी साफ हो जाएगा।

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आईजी डॉ. राकेश सिंह ने बताया कि बिथरी में हत्या कर भागे आरोपियों को हथियार बरामदगी में जेल भेजने के मामले में चौकी प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। बदायूं एसएसपी को निर्देश दिया गया है कि सिविल लाइंस थाना प्रभारी व अन्य संभावित लोगों की भूमिका की भी जांच करा ली जाए। जो दोषी मिलेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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