राइफल क्लब का कामकाज देख रहे सेवानिवृत्त बाबू ने बिना अनुमति साढ़े चार हजार रुपये का मानदेय बढ़वा लिया। डीएम को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने नगर मजिस्ट्रेट से जांच कराई। नगर मजिस्ट्रेट राजेश कुमार वर्मा ने जांच में मामला सही पकड़ा। अभी दोषी बाबू के खिलाफ किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
पिछले साल नवंबर माह में राइफल क्लब समिति की बैठक हुई। एडीएम सिटी की अध्यक्षता में हुई बैठक में राइफल क्लब में विकास कार्य कराने के साथ बाबू के मानदेय बढ़ाने पर भी चर्चा हुई थी, जिसमें प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा गया। आरोप है कि राइफल क्लब का कामकाज देख रहे सेवानिवृत्त बाबू ने क्लब की समिति के अध्यक्ष डीएम और सचिव नगर मजिस्ट्रेट की बिना अनुमति साढ़े चार हजार रुपये मानदेय बढ़वाने का पत्र बनाया और संबंधित पटल को दे दिया। प्रशासनिक सूत्र के अनुसार बाबू का मानदेय 10500 रुपये था और 4500 रुपये बढ़ाने पर 15 हजार हो गया। मामले की जानकारी मिलने पर डीएम के निर्देश पर नगर मजिस्ट्रेट ने जांच कर मामला सही पाया, इस पर तत्काल बढ़ा मानदेय रुकवा दिया गया। इधर, नगर मजिस्ट्रेट राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि प्रकरण में जांच पूरी कर ली है। जांच में बाबू दोषी मिला है। कार्रवाई करने के संबंध में जिलाधिकारी के साथ भी चर्चा हुई है। कार्रवाई करने के संबंध में जल्द बताया जाएगा।