बरेली। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) औसत 207 से घटकर 78.9 तक सुरक्षित सीमा में पहुंच गया है। हालांकि, सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी में सांस के मरीजों की बढ़ती संख्या इन दावों पर सवाल उठा रही है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में दस साल पहले औसतन 80-120 मरीज आते थे, जो अब बढ़कर करीब ढाई सौ हो गए हैं। इनमें 30 फीसदी मरीज सांस संबंधी समस्याओं से पीड़ित होते हैं। कुल ओपीडी भी 800-900 से बढ़कर प्रतिदिन करीब 1,200 मरीजों तक पहुंच रही है। वरिष्ठ फिजिशियन एमएल अग्रवाल के अनुसार अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, गले में खराश और सांस फूलने जैसी समस्याओं के मरीज अधिक संख्या में आ रहे हैं। इमरजेंसी में भी गंभीर हालत में बुजुर्गों के सांस फूलने के मामले बढ़े हैं।
वायु प्रदूषण के साथ धूल, धूम्रपान, एलर्जी, मौसम में बदलाव और बढ़ती उम्र भी सांस रोगों की वजह हैं। नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत दस वर्ष पूर्व पीएम-10 का स्तर 207 था, जो 26 फीसदी घटकर 78.9 रह गया है। चेस्ट फिजिशियन पुनीत अग्रवाल ने कहा कि पीएम-10 में कमी एक सकारात्मक संकेत है। हालांकि, लोगों की सेहत पर असर केवल इसी एक प्रदूषक से नहीं पड़ता। पीएम-2.5, वाहनों का धुआं, एलर्जी पैदा करने वाले कण, मौसम में बदलाव और संक्रमण जैसे कई कारक भी सांस रोगों के लिए जिम्मेदार हैं।
जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई भी की जा रही
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी चंद्रेश कुमार ने बताया कि राजेंद्र नगर और सिविल लाइंस में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन हैं। इन केंद्रों से पीएम-10, पीएम-2.5 और एक्यूआई की निगरानी हो रही है। नगर निगम भी यांत्रिक सड़क सफाई, पौधारोपण और धूल नियंत्रण के उपायों पर काम कर रहा है। प्रदूषण के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई भी की जा रही है।
61 करोड़ से और तेज होंगे प्रदूषण नियंत्रण के काम
नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य एनकैप के पहले चरण में मिले 33 करोड़ रुपये से सुभाषनगर, जोगी नवादा में नगर वाटिका विकसित की। मढ़ीनाथ में सीसी रोड बनाई। कई कच्चे मार्गों पर टाइल्स, पौधारोपण हुआ। हरित श्मशान भूमि विकसित की। एंटी स्मॉग गन, आधुनिक सड़क सफाई मशीनें खरीदी गईं। अब 61 करोड़ रुपये की दूसरी किश्त मिली है, इससे धूल नियंत्रण, हरित विकास कार्यों और तेज होंगे।
बीते दस वर्ष का एक्यूआई रुझान
वर्ष एक्यूआई स्थिति
2016 165-198 खराब
2017 140-190 खराब
2018 140-184 मध्यम-खराब
2019 135-176 मध्यम
2020 120-158 मध्यम
2021 105-146 मध्यम
2022 90-134 मध्यम
2023 90-122 संतोषजनक की ओर
2024 85-112 संतोषजनक
2025-26 76-96 संतोषजनक
(नोट: प्रदूषण विभाग से प्राप्त औसत एक्यूआई)