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बरेलीः अग्रवाल दंपती की हत्या... पैसे की चमक देखकर

सार

उद्योगपति की नौकरानी अंशु को जीवनसाथी बनाने के लिए भगा ले जाने के इरादे से दोस्तों के साथ आया था देवेंद्र, सबसे पहले उसी को मारा
 
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तिहरे हत्याकांड के पकड़े गए हत्यारोपी।
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विस्तार
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घर का वैभव देख भूल गया प्रेम, आननफानन में बना ली लूटपाट की योजना

बरेली। पैसे की चमक इंसान को हैवान बना देती है, परसाखेड़ा में उद्योगपति सुधीर अग्रवाल, उनकी पत्नी मधुलिका और नौकरानी अंशु की हत्या के मामले में यह कहावत मिसाल बन गई। अंशु का प्रेमी देवेंद्र अपने तीन दोस्तों के साथ उसे भगा ले जाने के लिए सुधीर की कोठी में घुसा था लेकिन जब हर तरफ फैला वैभव देखा तो इरादा बदल गया। देवेंद्र और उसके दोस्तों ने आननफानन घर में लूटपाट की योजना बना डाली और सबसे पहले अंशु को ही अपने रास्ते से हटाया।
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सुधीर अग्रवाल, उनकी पत्नी मधुलिका और नौकरानी अंशु की हत्या 24 अक्तूबर 2015 को दिनदहाड़े हुई थी। 28 अक्तूबर को पुलिस ने अंशु के प्रेमी देवेंद्र सिंह और उसके दोस्त अजय कश्यप को गिरफ्तार किया। बाद में दो और दोस्त ओमकार और संजू गिरफ्तार किए गए। छानबीन में जो तथ्य सामने आए, पुलिस ने उनके आधार पर खुलासा किया कि देवेंद्र और अंशु के प्रेम संबंध थे। दोनों शादी करना चाहते थे। देवेंद्र ने अंशु को भगा ले जाने की योजना बनाई थी। अंशु भी इस पर सहमत थी। तय योजना के मुताबिक 23 अक्तूबर की रात पहुंचे देवेंद्र और उसके साथी अजय कश्यप, ओमकार और संजू को अंशु ने चुपचाप कोठी में अंदर लाकर छिपा दिया। देवेंद्र ने अंशु को बताया था कि दोस्तों को वह इसलिए साथ लाया है ताकि सुधीर और मधुलिका उसे ले जाने का विरोध करें तो वह उनकी मदद ले सके।
पुलिस के मुताबिक अंशु अक्सर देवेंद्र को अपने मालिक की शानशौकत और रहनसहन के बारे में बताती रहती थी, लिहाजा उसने तड़के उसे साथ लेकर भागने से पहले रात को कोठी में ही मौज-मस्ती की योजना बनाई थी। 23 अक्तूबर की रात देवेंद्र और उसके दोस्तों ने कोठी में ही खाना खाया। रात में ही देवेंद्र और उसके दोस्तों का इरादा बदल गया। सुबह अंशु ने देवेंद्र के पास बांका देखा तो विरोध किया। थोड़ी सी नोकझोंक के बाद ही देवेंद्र ने अपने दोस्तों की मदद से अंशु की हत्या कर दी। शोर मचा तो मधुलिका पहुंच गईं, चारों ने मिलकर उन्हें भी मार दिया। सुधीर अग्रवाल की हत्या उन्होंने उनके कमरे में जाकर की।

मधुलिका के लूटे गए मोबाइल के जरिए हत्यारों तक पहुंची पुलिस

हत्या के बाद बदमाश सुधीर अग्रवाल के घर से 40 हजार की नकदी, जेवरात और एक मोबाइल लूटकर ले गए थे। मधुलिका का मोबाइल अजय कश्यप के हिस्से में आया था और वारदात के फौरन बाद उसने दूसरा सिम डालकर उसे इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। नतीजा यह हुआ कि पुलिस को हत्यारोपियों को तलाश करने में ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी। फोन को सर्विलांस पर लगाते ही अजय कश्यप ट्रेस हो गया और पुलिस ने उसे पकड़ लिया। अजय से पूछताछ के बाद सारी कहानी खुल गई। उसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त बांका भी बरामद हो गया। इसके बाद देवेंद्र समेत बाकी आरोपी भी पकड़ लिए गए।

बेहद क्रूरता से की गईं थीं तीनों हत्याएं : सुंदरानी

आईआईए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और तिहरे हत्याकांड में भरे गए पंचनामा के गवाहों में शामिल सुरेश सुंदरानी ने बताया कि घटना वाले दिन सुबह सबसे पहले पुलिस के साथ वही मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने ही रामपुर बाग में रहने वाले सुधीर अग्रवाल के चचेरे भाई वीरेंद्र स्वरूप अग्रवाल को सूचना दी। बकौल सुंदरानी, बदमाशों ने वारदात को बड़े खतरनाक अंदाज में अंजाम दिया था। मधुलिका और नौकरानी अंशु के शव घर में पहली मंजिल पर पड़े थे। सुधीर पैरालिसिस से पीड़ित थे और बिस्तर से नहीं उठ पाते थे। उन्हें हत्यारों ने उनके कमरे में ही बेड पर जाकर मारा था। इस नृशंस हत्याकांड ने स्थानीय उद्योग जगत को हिला दिया था। परसाखेड़ा के उद्यमी बेहद दहशतजदा थे।

दर्दनाक यादों ने मजबूर किया तो बेच दी कोठी

बरेली। उद्योगपति सुधीर अग्रवाल ने इंडोनेशिया से लौटने के बाद परसाखेड़ा में अपनी फैक्टरी के अंदर ही आलीशान कोठी बनवाई थी और उसी में रहते थे। हत्याकांड के बाद करीब चार साल यह कोठी खाली पड़ी रही। परिवार के लोगों के मुताबिक कोठी उन्हें सुधीर और मधुलिका की दर्दनाक मौत की याद दिलाती थी, इसलिए उसे बेच दिया।
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सुधीर अग्रवाल केमिकल के बड़े एक्सपर्ट थे, इसी वजह से उद्योग जगत में उन्होंने काफी नाम कमाया था। काफी समय वह इंडोनेशिया में रहे जहां से लौटने के बाद उन्होंने परसाखेड़ा में तीन फैक्टरी स्थापित की थीं। हत्या से करीब सात साल पहले पैरालिसिस के शिकार हो जाने के कारण उनका कारोबार ठप हो गया। फैक्टरी में बनी आलीशान कोठी ही उनका संसार बन गई। सिर्फ मधुलिका ही जरूरत पड़ने पर बाहर आती-जाती थीं।
सुधीर अग्रवाल के रामपुर बाग में रहने वाले तहेरे भाई वीरेंद्र स्वरूप अग्रवाल ने बताया कि सुधीर के बेटे जितेश हैदराबाद और बेटी डॉली नोएडा में रहती हैं। घटना के बाद वही सबसे पहले मौके पर पहुंचे थे। हत्यारों ने बड़ी बेरहमी से वारदात को अंजाम दिया। सुधीर तो पैरालिसिस होने के कारण बिस्तर से भी नहीं उठ पाते थे। फिर भी उन्हें मार दिया। क्रूर हत्याकांड को कोई नहीं भुला पाया, इसी कारण उनके बच्चे इस कोठी में रहने की हिम्मत नहीं जुटा पाए और उसे बेच दिया।

इन बड़े मामलों में भी अभी फैसले का इंतजार

जैन दंपती हत्याकांड : सिविल लाइंस में 11 जून 1990 की रात कारोबारी नरेश जैन और उनकी पत्नी पुष्पा जैन की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्या का पति पप्पू गिरधारी समेत कई अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। यह मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है।
व्यापारी की पत्नी और बच्चों समेत हत्या : वर्ष 2016 में 28 सितंबर को इज्जतनगर की वीरसावरकर नगर मेेेेेेेेेें रहने वाले नरेश सेठी ,उनकी पत्नी शिखा सेठी और उनके 16 साल के बेटे शुभ व 15 साल की बेटी आस्था की लुटेरों ने हत्या कर दी थी। यह मामला भी कोर्ट में विचाराधीन है।
हिमांशु गिहार एनकाउंटर केस : छह जनवरी 2006 को फरीदपुर के गांव गुलाबनगर के पास शाहजहांपुर में आर्डनेंस क्लोदिंग फैक्टरी के दरबान अशोक गिहार के बेटे 18 वर्षीय हिमांशु गिहार का एनकाउंटर कर दिया गया था। जांच में मामला फर्जी पाए जाने पर तत्कालीन मीरानपुर कटरा एसओ दिनेश कुमार सिंह, सिपाही कमलेश, सुरेश और अंजनी पांडेय को नामजद कराते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई गइ थी। यह मामला भी अभी विचाराधीन है।

किराएदार ने लिखाई थी एफआईआर 11 लोगों ने दी अदालत में गवाही

बरेली। उद्योगपति सुधीर अग्रवाल, उनकी पत्नी और नौकरानी की हत्या के मामले में उनके किराएदार जयप्रकाश ने एफआईआर दर्ज कराई थी। अदालत में इस हत्याकांड की सुनवाई के दौरान 11 लोगों ने गवाही दी।
जयप्रकाश ने 24 अक्तूबर 2015 को लिखाई रिपोर्ट में कहा था कि घटना वाले दिन दोपहर करीब दो बजे सफाईकर्मी अजय ने उन्हें बताया कि मैडम (मधुलिका) और नौकरानी (अंशु) को फोन करने पर कोई जवाब नहीं मिल रहा है। उन्होंने उसके साथ जाकर देखा तो दरवाजा खुला था। बेड पर सुधीर अग्रवाल की लाश पड़ी थी और अलमारी का सामान बिखरा हुआ था। मकान के ऊपरी हिस्से के बरामदे में मधुलिका और अंशु की खून से लथपथ लाशें पड़ी थीं। लग रहा था कि लूटपाट के बाद तीनों की हत्या की गई है। 
पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर छानबीन शुरू की तो पता चला कि नौकरानी अंशु के खड़ौआ में रहने वाले देवेंद्र से प्रेम सबंध थे जो मूलरूप से एटा के गांव बंधा का निवासी है। उसने अपने दोस्त ओमकार, संजू और खड़ौआ के अजय कश्यप के साथ वारदात की है। घटनास्थल से इन लोगों ने एक मोबाइल और 40 हजार रुपये भी लूटे। कोर्ट में पैरोकार राम गुप्ता के मुताबिक इस मामले में 11 लोगों की गवाही हुई।

अंशु की मां की गवाही से साफ हुआ सलाखों के पीछे पहुंचने का रास्ता

अदालत में गवाही के दौरान अधिकतर गवाहों ने तथ्यों का समर्थन नहीं किया। इनमें कुछ सुधीर अग्रवाल के रिश्तेदार भी थे। अधिकतर गवाहों ने पुलिस को दिए गए बयान से अदालत में कन्नी काट ली लेकिन नौकरानी अंशु की मां शकुंतला देवी की गवाही ने मामला साफ कर दिया। उन्होंने अपनी गवाही में कहा कि उनकी 17 वर्षीय बेटी को अभियुक्त देवेंद्र ने अपने चंगुल में फंसा लिया था। उसने ही साजिश रचकर इस वारदात को अंजाम दिया।

परसाखेड़ा स्थित अग्रवाल दंपती का घर और फैक्टरी।

 

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