बरेली। अवैध कॉलोनियां बनाने वाले बिल्डर तो करोड़ों कमाकर एक किनारे हो गए, अब विनियमितिकरण के नाम पर इन कॉलोनियों में रहने वालों की जेबें हल्की करने की तैयारी है। महायोजना- 2031 में अफसरों का इरादा इन कॉलोनियों को विनियमित कर उनमें मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रस्ताव शामिल करने का है। इससे पहले कॉलोनियों को विनियमित कराने के लिए कई बार बिल्डरों को नोटिस दिए गए थे लेकिन बिल्डरों ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं ली।
महायोजना- 2031 के लिए बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने 22 अलग-अलग बिंदुओं पर कार्ययोजना तैयार की है। हाल ही में हुई बैठक में विनियमितिकरण के लिए अवैध रूप से बसाई गई कॉलोनियाें का चयन करने के साथ विनियमितीकरण शुल्क कॉलोनी में रहने वालों से ही वसूलने की भी बात हुई। बता दें कि शहर में अवैध कॉलोनियों की संख्या सैकड़ों में है। इनमें कई कॉलोनियां ऐसी हैं जो शहर की प्रमुख कॉलोनी मानी जाती हैं लेकिन वैध नहीं हैं। इन कॉलोनियों का निर्माण करने वाले बिल्डरों ने खुद तो करोड़ों का मुनाफा कमाया ही, बीडीए के अफसरों की भी जेबें भी गर्म कीं। अब ये बिल्डर कंपाउंडिंग में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। बिल्डरों के दिलचस्पी न लेने की वजह से ही कॉलोनियों के विनियमितिकरण की प्रक्रिया सालों से अटकी पड़ी है।
सौ मीटर के मकान में रहने वालों को देने पड़ेंगे ढाई से तीन लाख
बीडीए की निर्धारित दरों के मुताबिक कॉलोनियों के विनियमितिकरण की प्रक्रिया में प्रति वर्ग मीटर पर ढाई से तीन हजार रुपये का शमन शुल्क देना होगा। यानी अगर किसी का सौ वर्ग मीटर का मकान है तो उसे ढाई से तीन लाख रुपये शुल्क भरना पड़ेगा। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि महायोजना- 2031 के लिए ये दर नए सिरे से निर्धारित होगी। संभावना जताई जा रही है कि करीब 50 फीसदी तक शुल्क कम किया जा सकता है। कौन सी कॉलोनियां विनियमितीकरण होंगी, इसका भी चिन्हांकन किया जाना है। कमिश्नर आर रमेश कुमार के निर्देश पर मास्टर प्लान वर्किंग ग्रुप का जल्द गठन कर महायोजना के सभी बिंदुओं पर सिफारिशें देने को कहा गया है। 31 जुलाई को महायोजना का ड्राफ्ट तैयार हो जाएगा जिसके बाद प्रत्येक बिंदु पर लोगों से सुझाव मांगा जाएगा।
छह साल पहले थीं 197 अवैध कॉलोनी इससे भी ज्यादा का इसके बाद निर्माण
बीडीए ने करीब छह साल पहले शहर और इससे सटे आसपास के इलाकों में 197 अवैध कॉलोनियां चिन्हित की थीं। अनुमान के मुताबिक इसके बाद इससे भी ज्यादा अवैध कॉलोनियां और विकसित हुई हैं। बीडीए के अफसरों के मुताबिक छह सालों में कई बार विनियमितीकरण के लिए कॉलोनाइजर, कॉलोनी की समिति और आवासों में रह रहे लोगों से कहा गया लेकिन किसी भी तरफ से कॉलोनियों को वैध कराने के लिए कोई पहल नहीं हुई। महायोजना- 2031 में इस पर गंभीरता से विचार हो रहा है।
विकास के लिए लिया जाता है शमन शुल्क
किसी भी अवैध कॉलोनी को नियमित करने से पहले उसमें जरूरी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए जितनी रकम की जरूरत होती है, उसे बीडीए जमा कराता है। विकास दो तरीके का होता है। बाह्य और आंतरिक विकास। कॉलोनी के भीतर सड़क, पानी, बिजली, पानी निकासी का इंतजाम आंतरिक विकास में जबकि कॉलोनी तक सड़क, बिजली और पानी की लाइन आदि पहुंचाना बाह्य विकास में शामिल है।
यह है कंपाउंडिंग की प्रक्रिया
आमतौर पर पहले कॉलोनी का नक्शा पास कराकर फिर प्रत्येक मकान मालिक अपने मकान का नक्शा पास कराता है। अवैध कॉलोनियों में पूरी कॉलोनी के विकास के लिए वहां की समिति को शमन शुल्क जमा करना होता है, इसके बाद हर भवन स्वामी से शमन शुल्क लिया जाता है। बताते हैं कि दोनों फेज का शमन शुल्क काफी हो जाता है, इसलिए लोग नियमितीकरण की योजना में रुचि नहीं लेते हैं
शहर की ज्यादातर नामचीन कॉलोनियां भी अवैध, इमारतों का भी नक्शा पास नहीं
साल 2011 की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक शहर में 213063 मकान हैं जिनमें से ज्यादातर का नक्शा बीडीए से स्वीकृत नहीं है। बीडीए की अवैध कॉलोनी की सूची में कूर्मांचल नगर विस्तार, आनंद विहार, आजाद नगर, एमईएस सोसाइटी, पवन विहार, सनराइज एंक्लेव, गणेशपुरम, फाइक एन्क्लेव, अशोक नगर, कैलाश पुरम, खुशबू एन्क्लेव, संसार एन्क्लेव, नूर नगर, दशरथ नगर, अवध विहार, पांचाल नगरी, पुष्पाजंलि, सैनिक कॉलोनी, एजाज नगर, गगन विहार, गोपाल नगर, आशापुरम, बालाजीपुरम, सुरेश शर्मा नगर एक्शटेंशन, दुर्गानगर समेत 197 कालोनियां शामिल हैं। इनका या तो लेआउट पास नहीं है या फिर भवन स्वामियों ने नक्शा मंजूर नहीं कराया है। माना जा रहा है कि जिस रफ्तार से अवैध कॉलोनियों की तादाद बढ़ी है, उसे देखते हुए अब यह संख्या पांच सौ के पार हो सकती है।
शुल्क कम होगा तभी विनियमितीकरण संभव
शहर में अवैध निर्माण की रोकथाम के लिए बीडीए की कार्रवाई सराहनीय है। कॉलोनी के विनियमितीकरण का शुल्क अगर ज्यादा हुआ तो लोग रुचि नहीं लेंगे। शुल्क दर कम करनी होगी। - अनुभव गुप्ता, समाजसेवी
पहले भी कई बार विनियमितीकरण के लिए आदेश जारी हुए। शमन शुल्क की दरें बहुत ज्यादा होने की वजह से कोई तैयार नहीं होता है। बैठक में शुल्क कम किए जाने की बात कही है। - दुर्गेश खटवानी, व्यापारी
महायोजना के लिए हुई बैठक में विनियमितीकरण पर कोई खास चर्चा नहीं हुई। सिर्फ यही कहा गया था कि कॉलोनियों को विनियमित किया जाना चाहिए। महायोजना अभी बन ही रही है। - रमनदीप सिंह, बिल्डर
अव्यस्थित बसाई गई कॉलोनियों को विनिमितीकरण करना चाहिए, लेकिन इसका बोझ लोगों पर पड़ेगा तो योजना सफल नहीं होगी। बीडीए को कॉलोनाइजर से भी शुल्क लेना चाहिए। - चंद्रभूषण गुप्ता, कारोबारी
अगर मिलने वाली सुविधाओं के बदले शुल्क अधिक वसूला जाएगा तो फिर से पिछली जैसी ही योजनाओं का हाल इसका भी होगा। शुल्क निर्धारण में जनता की भागेदारी जरूरी है। - रंजीत जौहरी, कारोबारी