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जिला न्यायालय की सुरक्षा का तामझाम तो बहुत सिर्फ दिखावे के लिए

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बिना रोकाटोकी गुजरते लोग।
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बरेली। शाहजहांपुर के कोर्ट परिसर में सोमवार को एक अधिवक्ता की हत्या कर दी गई। इससे पहले दिल्ली की रोहिणी कोर्ट में भी हत्या हो चुकी है, लेकिन बरेली में जिला न्यायालय की सुरक्षा अब भी भगवान भरोसे है। यहां सुरक्षा ड्यूटी में लगे अधिकांश पुलिसकर्मी आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखने से ज्यादा मोबाइल और गपशप में व्यस्त रहते हैं। हालात ये हैं कि अगर कोई अपराधी वारदात की मंशा से कोर्ट परिसर में घुसे तो उसे रोकना या पकड़ना आसान नहीं होगा।
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सबसे व्यस्त प्रवेश पर सर्वाधिक लापरवाही
जिला न्यायालय के पश्चिमी प्रवेश द्वार से सर्वाधिक लोग अदालतों में आते-जाते हैं। सोमवार को यहां दो मेटल डिटेक्टर डोर लगे मिले और चार पुलिसकर्मी तैनात थे। डोर के पास ही कुछ खाली स्थान था, जहां से लोग अपनी मर्जी से गुजर रहे थे। कुछ दूरी पर बैठे पुलिसर्मियों का न तो वहां आने-जाने वालों पर ध्यान था और न ही वे किसी को टोक रहे थे।
दक्षिण दिशा का मेटल डिटेक्टर डोर ही खराब
सर्वाधिक व्यस्त प्रवेश द्वार से दक्षिण दिशा में बरामदे के किनारे पर भी एक मेटल डिटेक्टर डोर रखा था, लेकिन यह खराब था और यहां निगरानी करने वाला भी कोई नहीं था। हर कोई अपनी मर्जी से इस डोर से होकर गुजर रहा था। कुछ लोग उसके बराबर से निकल रहे थे। निगरानी के नाम पर यहां कोई व्यवस्था नजर नहीं आई।
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मुख्य द्वार से सौ मीटर दूर थे पुलिसकर्मी
जिला न्यायालय के मुख्य द्वार पर तीन मेटल डिटेक्टर डोर लगाए गए हैं। तीनों चालू हालत में हैं, लेकिन इनके दोनों ओर खुली जगह है, जिसके चलते कोई भी व्यक्ति कहीं से भी निकले कोई रोकने या पूछने वाला नहीं है। यहां जिन पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगी थी वे डोर से करीब सौ मीटर दूर बैठे नजर आए।
दक्षिणी निकास पर सुरक्षा चाकचौबंद
कोर्ट परिसर के दक्षिणी निकास की ओर न्यायिक अधिकारियों की पार्किंग है। ज्यादातर जज इसी रास्ते से कोर्ट परिसर में पहुंचते हैं। इस वजह से यहां सारी व्यवस्थाएं चाकचौबंद मिलीं। रास्ता संकरा होने के चलते एक ही मेटल डिटेक्टर डोर था, जिससे लोग आवागमन कर रहे थे। पुलिस भी यहां मुस्तैद मिली।
हर प्रवेश द्वार पर पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं और सभी चालू हैं। समय-समय पर उनकी जांच भी कराई जाती है। - रोहित सिंह सजवाण, एसएसपी
कचहरी गेट पर जो सुरक्षा कर्मी तैनात हैं, उन्हें हर किसी की सावधानी पूर्वक चेकिंग करनी चाहिए। सामान चेक करने के लिए मशीन तो लगी है, लेकिन शायद ही कभी किसी का सामान चेक किया जाता है। अधिवक्ताओं की पहचान सुनिश्चित करने के बाद ही उनको प्रवेश दिया जाए। इसमें बार एसोसिएशन की भी मदद ली जा सकती है।
- एमपी सिंह, अधिवक्ता
सबसे पहले परिसर में वादकारियों की संख्या निश्चित की जाए। एक आदमी के साथ न जाने कितने लोग चले आते हैं। परिसर में लगे अधिकांश सीसीटीवी कैमरे काम ही नहीं कर रहे हैं। उनको दुरुस्त कराया जाए। जिन सुरक्षा कर्मियों को परिसर में ड्यूटी है, वह अधिकांश समय एक ही स्थान पर बैठे रहते हैं। उनको परिसर में घूमना चाहिए।
- आशिक अली, अधिवक्ता
पिछले कुछ दिनों में न्यायालय परिसर की सुरक्षा में सेंध लगाने की कई घटनाएं हुई हैं। वकीलों पर हमले भी हो रहे हैं। कम से कम परिसर में तो वकील अपने आपको सुरक्षित महसूस करें, इसके पुख्ता इंतजाम होने चाहिए। पुलिस को इस पर ध्यान देना चाहिए। सुरक्षा के मामले में कोई ढील नहीं दी जानी चाहिए।
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- सनुज यादव, अधिवक्ता
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