बरेली। कुर्मांचल नगर में आयोजित पर्वतीय समाज की 60वीं रामलीला में शुक्रवार को कैकयी-मंथरा संवाद, दशरथ-कैकयी संवाद, राम-सीता-लक्ष्मण संवाद, राम वनवास, केवट प्रसंग और सुमन मिलाप की लीला के मंचन ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
लीला का मंचन श्रीराम के राज्याभिषेक की घोषणा के साथ हुआ। इसी बीच दासी मंथरा अपनी चालों से रानी कैकेयी के कान भरती है। वह कैकेयी को समझाती है कि श्रीराम के राजा बनने पर उनके पुत्र भरत का भविष्य संकट में पड़ जाएगा। मंथरा की बातों में आकर रानी कैकेयी कोप भवन में चली जाती हैं। राजा दशरथ जब कैकेयी को मनाने पहुंचते हैं, तो कैकेयी उनसे अपने दो पुराने वरदान मांग लेती हैं। पहले वरदान में भरत को अयोध्या का राजसिंहासन और दूसरे वरदान में श्रीराम को 14 वर्ष का कठोर वनवास। यह सुनते ही राजा दशरथ गहरे आघात में चले जाते हैं। इसके बाद राम वनगमन की लीला का मंचन हुआ। पिता के वचनों को सर्वोपरि मानते हुए भगवान श्रीराम सहर्ष वन जाने को तैयार हो जाते हैं। माता सीता और भाई लक्ष्मण भी उनके साथ वन जाने की हठ करते हैं। मंचन के दौरान अध्यक्ष देवेंद्र सिंह दियोलिया, महासचिव डॉ. नरेंद्र सिंह बिष्ट, कुंवर सिंह बिष्ट, मदन सिंह बिष्ट, इंदर सिंह बिष्ट, गिरीश पांडे, चंद्र प्रकाश जोशी आदि मौजूद रहे।