बरेली। बिथरी चैनपुर और भोजीपुरा को छोड़ दिया जाए तो बाकी सभी सात सीटों पर सपा और भाजपा में कांटे की टक्कर के आसार हैं। बिथरी और भोजीपुरा में बसपा भी मुकाबले में है। मतदाताओं ने प्रत्याशी और उनके समर्थकों को भ्रमित भी किया। वादे कुछ और किए लेकिन मतदान के समय बटन कहीं और दबा दिया।
नाथनगरी से विधानसभा में पहुंचने की राह इस बार इतनी आसान नहीं है। मतदान प्रतिशत न बढ़ना, मुद्दाविहीन चुनाव और किसी भी पार्टी की लहर न होने से एक-दो सीटों को छोड़कर किसी भी सीट की तस्वीर साफ नहीं हो सकी है। इन पर कांटे की टक्कर दिखाई दे रही है। विधानसभा का रास्ता उसी के लिए खुलेगा जो पार्टी के बेस वोट के साथ दूसरे वर्गों में सेंधमारी कर पाया होगा। बिथरी चैनुपर और भोजीपुरा सीट पर जिस पार्टी के समर्थक मतदान केंद्र तक वोटरों को खींच ले जाने में सफल रहे होंगे वही त्रिकोणीय गणित में अपनी नैया पार लगाने में सफल होंगे।
मतदाताओं ने भी खूब चलाया अपना दिमाग : चुनाव में जितनी तैयारी प्रत्याशियों ने की थी, उससे भी आगे जाकर तैयारी मतदाताओं की थी। सबकी हां में हां मिलाई, सबको आश्वासन दिया और वोट वहीं दिया जहां का मन बना था। मतदान करने के बाद भी खुलासा नहीं किया। बिथरी सीट के पदारथपुर बूथ पर युवा संजय, विनोद, आयुष, प्रत्यूष और किशन वोट देकर बाहर निकले तो एक जगह ही सभी पार्टियों के बिस्तर लगे हुए थे।
सभी हंसते हुए पूछ रहे थे वोट वहीं देकर आए हो न, तो वे सबकी हां में हां मिला रहे थे लेकिन पत्ते नहीं खोल रहे थे। मीरगंज में मितौली पोलिंग बूथ पर एक पार्टी के एजेंट कागज कलम लेकर बैठे थे और दावा कर रहे थे कि अब तक इतने वोट उन्हें मिले हैं और सिर्फ इतने विपक्षी दल को मिले हैं। ठीक उसी तरह के आंकड़े दूसरी पार्टी का एजेंट बता रहा था।
‘वोट फॉर ओपीएस’ से भी सीटों के बदलेंगे समीकरण : पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा सपा के लिए मास्टर स्ट्रोक साबित हो सकता है। सीटों पर परिणाम यदि 2017 के तरह बन रहे होंगे तो यह वोट समीकरण बदलने का माद्दा रखता है। जिले में पुरानी पेंशन बहाली का अभियान चला रहे संगठनों में मौजूदा समय में 15 हजार कर्मचारी हैं।
सपा की घोषणा के बाद इन कर्मचारियों ने ‘वोट फॉर ओपीएस’ का अभियान चलाया था। व्हाट्सअप ग्रुप बनाकर कर्मचारियों ने आपस में कई संवाद किए और गूगल मीट के माध्यम से फैसला जताया कि जो उनके हित की बात करे, उसे ही वोट देंगे। पंद्रह हजार कर्मियों के औसतन पांच परिजन भी मानें तो ये वोट करीब 75 हजार हो रहा है। इन्हें अलग-अलग सीटों पर भी बांट दिया जाए तो यह प्रत्येक सीट पर सपा को फायदा पहुंचा रहे हैं।