कोयला के बजाय मैली, गुल्ला जलाकर पका रहे ईंट
जांच में पता चला है कि भट्ठा मालिक विभाग की ओर से कोयले की खपत के आधार पर मानक के अनुरूप प्रति 18 मीट्रिक टन कोयला प्रयोग के सापेक्ष सामान्य भट्ठे में न्यूनतम एक लाख ईंटों का उत्पादन का आकलन होता है। जबकि जिगजैग भट्ठे में 12 मीट्रिक टन कोयला प्रयोग के आधार पर एक लाख ईंट का उत्पादन होता है।
इससे बचने के लिए कई कारोबारी कोयले के स्थान पर 90 फीसदी वैकल्पिक ईंधन जैसे कोयले की धूल, गुल्ला, मैली अन्य का प्रयोग कर रहे हैं। इसका प्लांट भी भट्ठा परिसर में लगा लिया है। ताकि उत्पादन का आकलन न हो सके। चेताया कि भट्ठा मालिक भले ही गुमराह करें, लेकिन स्थलीय जांच में ईंट उत्पादन का आकलन करने में तीन सक्षम है। जो कर चोरी कर रहे हैं वे बचेंगे नहीं।