बरेली। घरेलू हिंसा के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। वन स्टॉप सेंटर पहुंचीं शिकायतों के अनुसार इनका सबसे बड़ा कारण एक-दूसरे पर शक करना, देर रात तक बाहर पार्टी करना और शराब पीकर मारपीट करना है। वर्ष 2022-23 में इस तरह के 460 मामले सामने आए थे। वहीं, वर्ष 2023-24 (31 मार्च) तक 385 शिकायतें दर्ज हुईं। वन स्टॉप सेंटर की शुरुआत आठ मार्च 2016 से बात करें तो अक्तूबर 2024 तक कुल 8685 मामले पंजीकृत हुए हैं।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, घरेलू हिंसा के मामलों में पहले दोनों पक्षों की काउंसलिंग कराकर रिश्ते बचाने का प्रयास किया जाता है। इसके बावजूद अगर बात न सुलझे तो मामलों को कोर्ट में दायर कर समाधान निकाला जाता है। जिला प्रोविजन अधिकारी मोनिका राणा बताती हैं कि नौकरी पेशा, पढ़े-लिखे लोग भी पत्नियों को प्रताड़ित करने में पीछे नहीं हैं। पति-पत्नी में विश्वास न होने के कारण विवाद ज्यादा बढ़ रहे हैं।
केस : एक
शराब की वजह से शुरू हुआ विवाद, काउंसलिंग के बाद सब ठीक
राजेंद्रनगर निवासी युवती का विवाह 2021 में हुआ था। शादी के दो साल बाद पति की देर रात पार्टी और शराब पीने की आदत के कारण विवाद शुरू हुआ, जिससे परेशान होकर महिला वन स्टॉप सेंटर पहुंची। शिकायत के बाद दोनों पक्षों के बीच तीन बार काउंसलिंग कराई गई और समझौता हो गया। पांच महीने तक वन स्टॉप सेंटर की टीम ने फॉलोअप किया तो दोनों ने सब ठीक बताया।
केस : दो
शराब पीने की आदत से परेशान हो पांच साल में ही छोड़ दी थी ससुराल
हाफिसगंज निवासी युवती की शादी वर्ष 2010 में हुई थी। पति की शराब पीने की आदत से परेशान होकर वह पांच साल बाद ही अपने मायके में आकर रहने लगी। हालांकि बच्चे पति के पास ही थे और वह मिलने भी नहीं देता था। थक-हारकर पीड़िता शिकायत लेकर वन स्टॉप सेंटर पहुंची। इसके बाद दोनों पक्षों की चार बार काउंसलिंग कराई गई। कोई हल न निकलने के बाद शिकायत को महिला थाने ट्रांसफर कर दिया गया।
केस : तीन
नशे में इतना पीटा था कि गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई थी
रामपुर गार्डन निवासी युवती का विवाह 2023 में हुआ था। विवाह के बाद पति देर रात तक बाहर रहता था और जब आता तो नशे में डूबा होता था। विरोध करने पर पत्नी को पीटता भी था। इस कारण उसके पेट में पल रहे गर्भस्थ शिशु की मौत भी हो गई थी। इसके बाद पीड़िता महिला थाने पहुंची। पति के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की गई।
किसी महिला को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना भी हिंसा ही कहलाता है। हिंसा का मुख्य कारण औरतों का स्वतंत्रता के साथ अपने काम को करना, बराबरी की कोशिश करना है, जिससे रिश्ते में तनाव उत्पन्न होता है। - डॉ. यशिका वर्मा, प्रवक्ता मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र बरेली
पहले अधिकांश महिलाएं घरेलू हिंसा के मामलों में खामोश रहती थीं, लेकिन अब वे स्वतंत्र हैं और अब महिला थानों में या यूपी 112 और 1090 जैसी सेवाओं के जरिए पुलिस से शिकायत कर रही हैं। महिलाओं की शिकायत पर पुलिस त्वरित कार्रवाई करती है। प्रयास यही रहता है कि मामला समझौते से हल हो जाए। - मानुष पारिक,एसपी सिटी
प्रति वर्ष घरेलू हिंसा के दर्ज आंकड़े 2020 से 2024 तक
साल मामले दर्ज
2020- 2021 - 155 (कोरोना के वजह से मामलों में कमी आई)
2021-2022 - 320
2022-2023 - 421
2023-2024(31 मार्च) - 385
2024(1 अप्रैल) से अब तक 300
नोटः (महिला थाना के आंकड़ों के मुताबिक)
साल मामले
2020- 2021 - 65 (कोरोना के वजह से मामलों में कमी आई)
2021-2022 - 55
2022-2023 - 60
2023-2024(31 मार्च) - 80
2024(1 अप्रैल) से अबतक 65
नोटः ( वन स्टॉप सेंटर के मुताबिक आंकड़े)
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