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वर्दी पर लगाया दाग: सीओ ने इंस्पेक्टर के कार्यालय पर मारा छापा, स्मैक तस्करों को छोड़ने के लिए किया था सौदा

Thu, 22 Aug 2024 07:38 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बरेली

सार

रात में ही थाने के किसी स्टाफ ने सीओ फरीदपुर गौरव सिंह को सूचना दे दी और छापा मारने पर रुपये भी बरामद होने की बात कही। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर बृहस्पतिवार सुबह ही सीओ गौरव सिंह ने इंस्पेक्टर के कार्यालय पर छापा मारा।
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रिश्वतखोर इंस्पेक्टर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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फरीदपुर में स्मैक तस्करों को छोड़ने के लिए फरीदपुर इंस्पेक्टर रामसेवक ने सात लाख रुपये में सौदा किया। दो तस्करों को छोड़ दिया वहीं एक तस्कर रुपये नहीं दे पाया तो उसे हिरासत में रखा। रात में ही थाने के किसी स्टाफ ने सीओ फरीदपुर गौरव सिंह को सूचना दे दी और छापा मारने पर रुपये भी बरामद होने की बात कही। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर बृहस्पतिवार सुबह ही सीओ गौरव सिंह ने इंस्पेक्टर के कार्यालय पर छापा मारा।

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खुद को फंसता देख इंस्पेक्टर रामसेवक एक व्यक्ति के साथ मौके से फरार हो गया। थाने पहुंचे एसपी साउथ मानुष पारीक व सीओ ने कार्यालय के पीछे बने इंस्पेक्टर के आवास की तलाशी ली तो वहां से नौ लाख रुपये बरामद हुए। सीओ ने इंस्पेक्टर के खिलाफ थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। इंस्पेक्टर के खिलाफ दर्ज मुकदमे की जांच दूसरे सर्किल के सीओ करेंगे।

फरीदपुर पुलिस ने बुधवार देर शाम को क्षेत्र के गांव नादिया अशोक निवासी आलम व नियाज अहमद सहित तीन लोगों को स्मैक तस्करी के आरोप में हिरासत में लिया। आरोपियों को हिरासत में लेते ही स्मैक तस्कर गैंग के सरगना एक्टिव हो गए और उन्होंने रात में ही इंस्पेक्टर फरीदपुर से उन्हें छोड़ने की बात की।
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दो लोगों को छोड़ने के लिए सात लाख रुपये में सौदा हुआ। तीसरा व्यक्ति रुपये नहीं दे पाया। इस पर उसे इंस्पेक्टर ने नहीं छोड़ा। रुपये लेने के बाद दो लोगों को पुलिस ने रात में ही छोड़ दिया। इंस्पेक्टर के काले कारनामों की जानकारी थाने के स्टाफ ने सीओ फरीदपुर को दी। उच्च अधिकारियों के निर्देश पर सीओ ने बृहस्पतिवार सुबह ही इंस्पेक्टर कार्यालय पर छापा मार दिया। इस दौरान इंस्पेक्टर मौका पाकर एक व्यक्ति के साथ थाने से फरार हो गया।

एसपी साउथ और सीओ ने इंस्पेक्टर के कार्यालय के पीछे बने आवास की तलाशी ली जहां से नौ लाख रुपये बरामद किए। इंस्पेक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद अब थाने के सिपहियों व अन्य स्टाफ की भूमिका की भी जांच होगी। बताया जाता है कि इंस्पेक्टर थाने के दरोगाओं दरकिनार कर सिपाहियों से वसूली कराता था। थाने के सिपाही थाने में जगह-जगह पंचायत लगाकर आरोपियों से रुपये वसूली कर पीड़ित पर दबाव बनाकर फैसला करवाते थे।

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