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कोरोना निपटाने को किया सैनिटाइजर का छिड़काव.. मलेरिया निपट गया

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काेराेना केस - फोटो : Feature
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बरेली। बीते वर्षों में जानलेवा साबित हुआ मलेरिया अबकी बार बेकाबू नहीं हो सका है। विशेषज्ञों के मुताबिक तमाम इलाकों में हुए सैनिटाइजेशन से कोरोना की रोकथाम भले न हुई हो लेकिन मच्छर जनित रोगों में करीब तीन चौथाई कमी दर्ज हुई है, यह कमी करीब 70 फीसदी है। मलेरिया के प्रकोप के चलते बीते सालों में अतिसंवेदनशील जिलों की सूची में दर्ज बरेली को अब सूची से बाहर किए जाने की भी उम्मीद जगी है। यह स्थिति सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने राहत की सांस ली है, विभागीय अधिकारियों ने सैनिटाइजेशन से मच्छरों के लार्वा की फौज खत्म होने की उम्मीद जताई है।
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कोरोना के शुरू होते ही शासन की ओर से वायरस को खत्म करने के लिए बड़े पैमाने पर सैनिटाइजेशन के निर्देश दिए गए थे। विशेषज्ञों के मुताबिक सैनिटाइजेशन के लिए हाइपोसोडियम क्लोराइड का प्रयोग किया गया। इसके चलते वायरस के साथ ही नाले, नदियों समेत जगह-जगह छिपे मच्छरों के लार्वा भी खत्म हुए। इससे मच्छरों की फौज तैयार नहीं हो सकी। अप्रैल से शुरू हुए सैनिटाइजेशन का सिलिसिला अगस्त तक जारी रहा। अनलॉक-5 शुरू होने के बाद इसमें कमी दर्ज हुई। मगर चार माह तक हुए सैनिटाइजेशन के असर से मलेरिया पीड़ितों की तादाद में रिकॉर्ड कमी दर्ज हुई है। करीब पांच दिन पहले डब्ल्यूएचओ की ओर से जारी रिपोर्ट में भी मलेरिया के आंकड़ों में बड़े पैमाने पर इस वर्ष गिरावट दर्ज किए जाने की बात कही है। बरेली में मलेरिया के लिहाज से रामनगर, मझगवां, भमोरा, फरीदपुर, कुंआडांडा, भोजीपुरा, मीरगंज और फतेहगंज पश्चिमी अतिसंवेदनशील माने गए हैं। अबकी बार भी इन इलाकों में नमूने लिए गए, मगर जांच रिपोर्ट में फरीदपुर, फतेहगंज पश्चिमी, कुंआडांडा में मलेरिया के इक्के दुक्के मामले ही सामने आए।

दो सालों तक जानलेवा साबित हुआ मलेरिया

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक मलेरिया प्लाज्मोडियम फेल्सीपेरम और वाइवैक्स की तादाद बीते दो सालों में सर्वाधिक दर्ज हुई थी। वर्ष 2018 और 2019 में 30 से 45 हजार के बीच वाइवैक्स और 17 हजार फेल्सीपेरम के पीड़ित मिले थे। प्रदेश में बरेली में सर्वाधिक मामले दर्ज होने के चलते रोकथाम के लिए शासन को कमान संभालनी पड़ी थी। एक अफसर पर कार्रवाई भी हुई। इस साल मलेरिया के करीब 11 हजार मामले सामने आए हैं। जिसमें वाइवैक्स के 7245 और फे ल्सीपेरम के 4051 मामले दर्ज हुए हैं। जो बीते साल की अपेक्षा चार गुना कम हैं।

14 सौ टीम कर रही निगरानी, हो रही फॉगिंग

जिला मलेरिया अधिकारी डीआर सिंह के मुताबिक कोरोना महामारी में मलेरिया कहीं घातक साबित न हो इसलिए शुरुआत से ही निगरानी के लिए टीम गठित कर दी गई थी। विभिन्न ब्लॉकों में करीब 14 सौ टीमें अभी भी काम कर रही हैं। बुखार आदि की जानकारी मिलने पर तत्काल सर्वे हो रहा है। मामला गंभीर मिलने पर एलाइजा जांच भी कराई जा रही है। उम्मीद जताई कि बीते सालों में मलेरिया नियंत्रण के लिए की गई कवायदों का भी असर दिखाई दे रहा है। वाइवैक्स का इलाज बीच में ही छोड़ने की वजह से संक्रमण ज्यादा मिला। हालांकि, अभी कोई मौत नहीं हुई है।

सैनिटाइजेशन से मच्छरों के लार्वा भी खत्म हुए हैं। अब तक मलेरिया विभाग की टीम ने भी संवेदनशील इलाकों समेत चार सौ से ज्यादा गांवों में डीडीटी और एंटीलार्वा का छिड़काव किया है। टीमें सक्रिय हैं अगर किसी को बुखार होता है तो वह जांच जरूर कराएं। - डॉ. विनीत शुक्ल, सीएमओ

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