अक्षर विहार तालाब को बिल्डरों के कब्जे से मुक्त कराने के लिए दोबारा पैमाइश कराने का मामला एक महीने से ठंडे बस्ते में है। न प्रशासन गंभीर है न नगर निगम और न ही राजस्व विभाग। कहा तो यही जा रहा है बिल्डरों ने सब को सेट कर रखा है। नगर निगम और राजस्व विभाग के अफसर नजूल से फ्रीहोल्ड कर बेची जमीन समेत तालाब की पैमाइश करने का मामला एक दूसरे पर टाल रहे हैं। एडीएम ने तालाब समेत पूरी जमीन की पैमाइश करने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी। कमेटी ने नगर निगम को चिट्ठी लिख दी खेल खत्म। नगर निगम के अतिक्रमण प्रभारी, एक्सईएन और मानचित्रकार इस मामले पर खामोश हैं।
नौ अप्रैल 2016 को बोर्ड की बैठक में मामला उठने के बाद मेयर डा. आईएस तोमर, नगर आयुक्त शीलधर सिंह यादव, एक्सईएन गयूर अहमद, मानचित्रकार समशुल हसन के अलावा पार्षदों ने भी मौके पर जाकर तालाब पर कब्जे की स्थिति देखी थी। मेयर ने बिल्डर का गेट हटाकर तालाब समेत दोनों बिल्डरों की पूर्व सांसद से खरीदी गई नजूल की पूरी जमीन समेत तालाब की दोबारा पैमाइश कराने के निर्देश भी दिए थे। इसके बाद नगर निगम के मानचित्रकार ने राजस्व विभाग को चिट्ठी लिख दी। इस चिट्ठी के जवाब में एडीएम सिटी ने नायब तहसीलदार सदर, कानून गो और लेखापाल की तीन सदस्यीय कमेटी बनाकर पैमाइश करने के निर्देश दिए। नायब तहसीलदार ने नगर आयुक्त को दोबारा चिट्ठी लिखकर तालाब संबंधी अभिलेख मांगे। तबसे नगर निगम खामोश है। पूरे मामले मेंएक माह बीतने के बाद भी न तो नगर निगम की जमीन से बिल्डर का गेट हटा और न ही तालाब की पैमाइश हुई। राजस्व और नगर निगम नजूल की जमीन की पैमाइश का मसला चिट्ठी के जरिए एक दूसरे पर टालकर बिल्डरों को फायदा पहुंचाने में लगे हैं।
‘अक्षर विहार तालाब की पैमाइश के लिए राजस्व विभाग को चिट्ठी लिखी गई थी। उसके बाद वहां से जवाब नहीं मिला। हम पैमाइश के लिए राजस्व टीम का इंतजार कर रहे हैं।’ विकास सेन, सहायक नगर आयुक्त
‘तालाब समेत जमीन की पैमाइश के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। नगर निगम से इस कमेटी को पैमाइश में सहयोग मिलने की उम्मीद है।’ आलोक कुमार, एडीएम सिटी
‘तालाब की पैमाइश राजस्व और नगर निगम की टीम मिलकर करेंगी। नगर निगम की ओर से राजस्व विभाग को चिट्ठी लिखी गई थी। मैं इस मामले में अधिकारियों से पूछूंगा कि पैमाइश का क्या हुआ।’ डा. आईएस तोमर, मेयर