बरेली। स्मार्ट सिटी की 200 करोड़ रुपये लागत की परियोजनाएं टेंडर से बाहर नहीं निकल पा रही हैं। बार-बार टेंडर निकाले गए, पर उनके संचालन के लिए निजी कंपनियों का चयन नहीं हो पाया। अब बड़ी कंपनियों को बुलाकर इन परियोजनाओं का संचालन कराने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, इन परियोजनाओं का संचालन कब तक शुरू होगा? इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
960 करोड़ की स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत अधिकतर काम मार्च में ही पूरे हो गए थे, लेकिन कई परियोजनाओं का संचालन अब भी अटका है। अर्बन हाट और हैंडीक्राफ्ट सेंटर जैसी प्रमुख परियोजनाएं भी संचालन की राह देख रही हैं। स्काईवाॅक, काॅमर्शियल कॉम्प्लेक्स, संजय कम्युनिटी हाॅल परिसर में बना सरोवर-मल्टीलेवल पार्किंग और जनसुविधा के लिए बनाए गए कियोस्क भी ठप पड़े हैं।
स्मार्ट सिटी कंपनी दो बार इनके टेंडर निकाल चुकी है। निजी फर्मों का चयन न होने से कारोबार और विकास को रफ्तार नहीं मिल पा रही है। अधिकारी समीक्षा बैठकों में व्यस्त हैं और कह रहे हैं कि प्रक्रिया चल रही है। अर्बन हाट के लिए टेंडर में जिन कंपनियों ने रुचि दिखाई है, अब उनके प्रस्ताव का परीक्षण किया जा रहा है। राजकीय इंटर कॉलेज में बने ऑडिटोरियम के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) तैयार कराया जा रहा है। मंडलायुक्त ने मंगलवार को परियोजनाओं की मौजूदा स्थिति पर बैठक बुलाई थी। इसमें उन अधिकारियों की नियुक्ति का अनुमोदन किया गया जो स्थानांतरण के बाद जिले में आए और स्मार्ट सिटी लिमिटेड में पदेन शामिल हैं।
स्मार्ट सिटी की परियोजनाओं का संचालन सुनिश्चित करने के लिए टेंडर निकाले गए थे। निजी कंपनियां पहले अपने मुनाफे का आकलन करती हैं। हम अपने नियमों के अंतर्गत निजी कंपनियों से संपर्क बनाए हुए हैं। उम्मीद है कि जल्द सार्थक परिणाम आएंगे। - संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त
इन परियोजनाओं को संचालन का इंतजार
अर्बन हाट
गांधी उद्यान और विकास भवन के बीच 44 हजार वर्गमीटर में 172 करोड़ की लागत से तैयार अर्बन हाट और हैंडीक्राफ्ट सेंटर संचालन की राह देख रहा है। जरी-जरदोजी, बेंत के फर्नीचर, ओडीओपी उत्पादों को इसके जरिये प्रोत्साहन दिया जाना है। इसमें होटल और प्रदर्शनी हाॅल के साथ मीटिंग हाॅल भी है। झूले आदि भी लगाए गए हैं।
स्काई वाॅक
स्काई वॉक की डिजाइन पर शुरू से सवाल उठते रहे, लेकिन तत्कालीन अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। 11 करोड़ रुपये की लागत से यह तैयार हुआ। पहली बार टेंडर निकाले गए तो सिर्फ एक ही फर्म आगे आई। दूसरी बार में तीन फर्में आई हैं। स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने फर्मोें की ओर से संचालन के तरीके का प्रस्तुतीकरण देखने का निर्णय लिया है।
स्मार्ट टायलेट
शहर में 12 स्मार्ट टायलेट बने, पर संचालन सिर्फ चार का हो रहा है। आठ अभी निजी फर्मों को दिए जाने हैं। दरअसल, निर्माण कराने वाली फर्म इनका काम अधूरा छोड़ गई थी। अधिकारी फर्म को नोटिस देते रहे। अब फर्म को काली सूची में डालकर दूसरी फर्म का चयन किया गया है। इनके संचालन का जिम्मा सुलभ इंटरनेशनल को सौंपा जा रहा है।
कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स
जंक्शन के निकट 4.7 करोड़ रुपये खर्च करके तांगा स्टैंड की जगह पर कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाया गया है। यह करीब एक साल पहले ही बनकर तैयार हो गया था। अभी तक खाली पड़ा है। अगर इसमें व्यापारिक केंद्र विकसित किया जाए तो शहर के विकास को रफ्तार मिल सकती है। अमर उजाला ब्यूरो