लखनऊ तक हो चुकी है समीक्षा, एफआर लगने के बाद भी हो चुकी है विवेचना
आईवीआरआई स्थित आवास में वर्ष 2015 में कैंची से गोदकर की गई थी हत्या
बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. दीपक शर्मा की हत्या का राज छह साल बाद भी नहीं खुल सका है। लखनऊ तक समीक्षा होने के बाद इसके खुलासे में कई टीमें लगाई गईं लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। फाइनल रिपोर्ट लगाकर यह मामला फाइलों में दफन कर दिया गया। हालांकि इसके बाद भी इस मामले की दोबारा जांच कराई गई लेकिन फिर भी नतीजा नहीं निकला।
आईवीआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. दीपक शर्मा की 28 जुलाई, 2015 की रात आवास में ही कैंची से गोदकर हत्या कर दी गई थी। घटना के समय वैज्ञानिक की मां सुशील देवी और नौकरानी दीपा घर में थी। उनके बयानों के मुताबिक, घटना वाली रात करीब नौ बजे दो लोग वैज्ञानिक से मिलने आए थे। डॉ. दीपक ने उन्हें ड्राइंग रूम में बैठाया था। वहां बातचीत के दौरान उनमें किसी बात पर विवाद हो गया तो दोनों ने डॉ. दीपक पर वहीं रखी कैंची से हमला करके उनकी हत्या कर दी। हत्यारों ने उनके शरीर पर नौ वार किए थे। वारदात के बाद कातिलों ने वैज्ञानिक की मां और नौकरानी को बाथरूम में बंद कर काफी देर तक घर में तलाशी ली और फिर भाग निकले।
एसटीएफ समेत कई टीमें लगीं सौ से ज्यादा लोगों से पूछताछ
इस बहुचर्चित मामले का कृषि मंत्रालय और शासन स्तर से संज्ञान लिया गया था। इसके खुलासे के लिए इज्जतनगर थाना पुलिस के अलावा एसटीएफ और क्राइम ब्रांच को भी लगाया गया था। सौ से ज्यादा लोगों से पुलिस ने पूछताछ की थी। इसमें वैज्ञानिक के ऑफिस और उनके निजी जीवन से जुड़ी तमाम बातें सामने आईं लेकिन पुलिस इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी कि हत्या किसने और क्यों की। वर्ष 2018 में इज्जतनगर पुलिस ने इसमें फाइनल रिपोर्ट लगा दी।
प्रेमनगर पुलिस भी हुई नाकाम
फाइनल रिपोर्ट लगने के बाद वैज्ञानिक हत्याकांड दोबारा चर्चा में आ गया। फरवरी, 2018 में तत्कालीन एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने इसकी विवेचना तत्कालीन प्रेमनगर इंस्पेक्टर को सौंप दी। काफी दिन तक वे इस मामले की जांच करते रहे लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला तो उन्होंने भी फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में भेज दी। इसमें कहा गया कि विवेचना भविष्य में भी जारी रहेगी, कोई साक्ष्य मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। मगर हकीकत यह है कि फाइनल रिपोर्ट लगने के बाद यह मामला फाइलों में दफन कर दिया गया।
जिन मामलों में सबूत नहीं मिलते हैं तो उनमें फाइनल रिपोर्ट लगा दी जाती है। इसके साथ ही विवेचना प्रचलित रहती है। जब भी उस मामले में साक्ष्य मिलता है, उसके आधार पर कार्रवाई शुरू कर दी जाती है। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ है। - रोहित सिंह सजवाण, एसएसपी