स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा फेल
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में स्थानीय बनाम बाहरी की बहस का चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ सका, जबकि इसे लेकर भाजपा के दिग्गजों मंच से मतदाताओं के अपीलें की थीं। यह भी कहा था कि अबकी सैफई वालों को नहीं स्थानीय उम्मीदवार दुर्विजय सिंह शाक्य को जिताएं पर यहां यादव मतदाता ने स्वजातीय उम्मीदवार सामने होने पर स्थानीय और बाहरी की बात को खारिज किया।
राह दिखाने वाले दुर्विजय बदायूं में फेल
बदायूं में भाजपा प्रत्याशी दुर्विजय शाक्य की हार ने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिन पर आने वाले दिनों में भाजपा के चुनावी रणनीतिकार मंथन जरूर करेंगे। भाजपा के प्रत्याशी संगठन में ब्रज प्रदेश के संगठन अध्यक्ष भी थे। चूक किस स्तर पर हो गई, हार की असल वजह क्या रही, यह खुलकर भले ही सामने नहीं आ पाए, लेकिन हकीकत पर गौर जरूर होगा।
सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल यादव के बेटे आदित्य यादव के सामने हार का सामना करने वाले भाजपा के दुर्विजय शाक्य के बारे में भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान साफ कर दिया था कि यही स्थानीय प्रत्याशी हैं। आदित्य को तो बाहरी करार दे दिया था।
स्थानीय मुद्दों को किया नजरअंदाज
स्थानीय होने के नाते भाजपा प्रत्याशी और उनके रणनीतिकारों को स्थानीय स्तर के ही जिन मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहिए था, उनमें विकास, महंगाई, छुट्टा पशुओं से किसानों को दिक्कत, बेरोजगारी, देहात क्षेत्र में सड़कों की मौजूदा स्थिति से लेकर चिकित्सकीय सेवाओं में खामियों पर छूने की कोशिश ही नहीं की गई थी। दूसरा यह कि कार्यकर्ताओं में भी पिछले दो लोकसभा चुनाव की तरह जोश नजर नहीं आया। इसका सीधा असर मतदान के प्रतिशत के गिरावट के रूप में सामने आया था।
दरअसल, भाजपा के दुर्विजय शाक्य को जिन दिनों बदायूं सीट से भाजपा ने प्रत्याशी घोषित किया, तब जिले में धारणा बनी कि वह खुद को संगठन का कुशल शिल्पकार साबित करने में किसी भी स्तर पर कमी नहीं छोड़ेंगे। फिर भी किसी स्तर पर चूक हो ही गई।
बड़े नेताओं ने की थीं सभाएं
शुरुआत में सांसद संघमित्रा मौर्य भी उनके साथ दिखाई पड़ती रहीं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी आदि ने बड़े नेताओं ने जिले में आकर चुनावी सभाएं भी की थीं। लेकिन फिर भी वह जीत न सके।