36,911 मतदाताओं को कोई प्रत्याशी पसंद नहीं
बरेली मंडल में 36,911 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया। कह सकते हैं कि इन मतदाताओं को कोई भी प्रत्याशी पसंद नहीं आया। मंडल में नोटा को सबसे ज्यादा वोट बदायूं में मिले। बरेली संसदीय सीट पर सबसे कम मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया।
बरेली में बढ़ा नोटा, अन्य जगह घटी संख्या
भले ही नोटा मंडल की सभी सीटों पर शीर्ष चार में जगह बनाने में सफल रहा मगर सिर्फ बरेली सीट पर नोटा को मिलने वाले मतों की संख्या 2019 की तुलना में बढ़ी है। बरेली सीट पर 2019 में 3,824 मतदाताओं ने नोटा को पसंद किया था। इस बार नोटा को 2,436 वोट ज्यादा मिले। वर्ष 2019 में बदायूं में 8,606, शाहजहांपुर में 9,037, आंवला में 9,198 और पीलीभीत में 9,973 मतदाताओं ने नोटा के विकल्प को पसंद किया था। इस बार इन चारों सीटों पर नोटा को पसंद करने वाले मतदाता घटे हैं।
बदायूं : इस सीट पर सपा के आदित्य यादव ने 5,01,855 वोट हासिल कर जीत का सेहरा सजाया। जमानत बचाने के लिए जरूरी मतों का आंकड़ा भाजपा के दुर्विजय शाक्य (4,66,864) ही पार कर पाए। बसपा के मुस्लिम खां (97,751) के अलावा संजीव कुमार (3,836), दिनेश कुमार (2,674), लता यादव (2,578), नीलम रानी पाल (2,438), रामप्रताप मौर्य (1,543), इशरत अली (1,513), सुलेमान (1,240), हरिराज सिंह (910) की जमानत नहीं बची।
शाहजहांपुर : यहां भाजपा के अरुण सागर 5,92,718 मत प्राप्त कर विजेता बने। जमानत बचाने के लिए जरूरी मतों का आंकड़ा सपा की ज्योत्सना गौंड 5,37,339 ही पार कर पाईं। बसपा के डॉ. दोदराम वर्मा (91,710), किरण (6,588), शिवकुमार (2,805), मीना कश्यप (2,061), प्रदीप कुमार (2,005), प्रेमचंद्र हरिजन (1,687), धर्मपाल (1,423), रमेश चंद्र वर्मा (1,076) की जमानत जब्त हो गई।
पीलीभीत : यहां जितिन प्रसाद ने 6,07,158 वोट पाकर जीत हासिल की। यहां जमानत बचाने के लिए 1,93,491 मतों की जरूरत थी पर सपा के भगवत सरन (4,42,223) ही इस आंकड़े को पार कर सके। बसपा के अनीस अहमद उर्फ फूल बाबू (89,697), राजीव कुमार सक्सेना (3,809), सुशील शुक्ला (2,727), आशीष कुमार (1,850), मोहम्मद शाहिद हुसैन (1,846), आदर्श पांडेय (1,726), संजय कुमार शुक्ला (1,631), प्रमोद भाई पटेल (1,539) की जमानत जब्त हो गई।