बरेली। नौ साल पहले बिशारतगंज के गांव शहबाजपुर में भैंसों की लड़ाई में हुए खूनी संघर्ष के दौरान भूरे की हत्या के मामले में विशेष न्यायाधीश अब्दुल कय्यूम की अदालत ने आठ अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस बवाल के दौरान कई लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए थे।
घटना वर्ष 2012 में तीन मई को शहबाजपुर गांव में हुई। बुंदन की ओर से लिखाई गई रिपोर्ट के मुताबिक घटना वाले दिन अरशद अपनी भैसों को पानी पिलाने के लिए गांव के बाहर ले जा रहा था। जब उसकी भैंस सतीश पाल के मकान के पास पहुंची तो सड़क पर खड़ी ओमपाल की भैंस को रगड़ते हुए निकली। इस पर ओमपाल सिंह ने अरशद को थप्पड़ मार दिया और गालियां दी। अरशद ने घर जाकर यह बात अपने पिता जिलानी को बताई।
जिलानी इसकी शिकायत करने ओमपाल सिंह के घर गए तो सतीश पाल, विजयवीर, ओमेंद्र उर्फ पीलू, पप्पू, विपिन, ऋषिपाल, चंद्रपाल, दन्नू और नरेश हथियारों से लैस होकर जिलानी के घर के सामने कब्रिस्तान में पहुंच गए और अंधाधुंध फायरिंग करने लगे। इस गोलीबारी में भूरे, नवी हसन, नजर उल्ला, जाहिद, बहन जरीन, असराना और नगमा गंभीर रूप से घायल हो गईं। जिलानी ने वहां भागकर घर में घुसकर दरवाजा बंद करके अपनी जान बचाई। इस दौरान वहां जमकर बवाल हुआ। लोग अपने जूते-चप्पल छोड़कर भागे और घर के दरवाजे बंद कर लिए। घायलों को अस्पताल भेजा गया, जिनमें से भूरे ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
तीन अभियुक्तों की हो चुकी है मौत
इस मामले के अभियुक्त विजय वीर, ओमपाल और चंद्रपाल की दौरान मुकदमा मौत हो गई। अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता सुनिति कुमार पाठक और एडीजीसी सुनील कुमार सिंह ने पैरवी की। सुनवाई के दौरान कुल 11 गवाह पेश किए। कोर्ट ने अभियुक्त सतीश पाल, ओमेंद्र उर्फ पीलू, पप्पू, विपिन, ऋषिपाल, चंद्रपाल, दन्नू और नरेश पाल को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।
जुर्माना भी लगा
कोर्ट ने सभी अभियुक्तों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने जुर्माने की आधी राशि घायल नवी हसन, नजर उल्ला, जाहिद, जरीन, असराना और नगमा को समान रूप से देने का आदेश किया है।
हिरासत में लेते ही रो पड़े आरोपी
सुनवाई के दौरान अभियुक्त सतीश, ओमेंद्र और चंद्रभान न्यायिक अभिरक्षा में जेल से अदालत पहुंचे। इसके अलावा जमानत पर चल रहे अभियुक्त पप्पू, विपिन, ऋषिपाल, दन्नू और नरेश पाल भी अदालत में हाजिर हुए। कोर्ट ने जैसे ही जमानत पर चल रहे अभियुक्तों को हिरासत में लेने का आदेश दिया, उनके चेहरे सफेद पड़े गए। वे सजा सुनकर रोने लगे। सजा सुनाने के बाद जब उन्हें जेल भेजा गया तो उनके परिवार वालों में भी चीख पुकार मच गई।