फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ये कैसी पाठशाला: भवन जर्जर, बरामदे में पढ़ाई... खतरे में बच्चों की जान, देखिए बरेली के इन स्कूलों की दशा

Fri, 01 Aug 2025 11:50 AM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

बरेली में दो स्कूल करीब सौ साल पुराने है। इनमें एक तो खंडहर में तब्दील हो चुका है। अमर उजाला टीम ने बृहस्पतिवार को इन स्कूलों की पड़ताल की। 
विज्ञापन
साहूकारा प्राथमिक विद्यालय नवीन प्रथम - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बरेली के सरकारी स्कूलों में कांवेंट स्तर की सुविधाएं मुहैया कराने के दावे साहूकारा प्राथमिक विद्यालय नवीन प्रथम के आगे खोखले साबित होते हैं। इस स्कूल का भवन खंडहर में तब्दील हो चुका है। बच्चे खतरे के साये में पढ़ाई करते हैं। हालात यह हैं कि तेज हवा चलने और बादल घिरने पर स्कूल में अवकाश कर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है। 
विज्ञापन


कैसी है पाठशाला... मुहिम के तहत परिषदीय विद्यालयों के हाल का जायजा लेने बृहस्पतिवार को अमर उजाला की टीम दोपहर करीब एक बजे साहूकारा प्राथमिक विद्यालय पहुंची। खंडहर जैसे भवन में प्रधानाध्यापिका और सहायक अध्यापिका बच्चों का रिकॉर्ड आदि तैयार कर रहीं थीं। सभी कक्षाओं में ताला था। 

यह भी पढ़ें- ये कैसी पाठशाला: टपकती छत... दीवारों की दरार से झांकता है खतरा, तस्वीरों में देखिए सरकारी स्कूलों की दशा
विज्ञापन


पूछने पर बताया कि दोपहर करीब 12 बजे घने बादल मंडराने लगे तो बच्चों की छुट्टी कर दी गई, ताकि वे छत से टपकते बारिश के पानी और ईंट गिरने पर चोटिल होने से बच सकें। छुट्टी से पहले बच्चों को मिड डे मील खिला दिया था। बताया कि छत और दीवार की दरारों से पीपल आदि पौधे निकल रहे हैं। भवन के बीचोंबीच अमरूद का पेड़ सूख चुका है। 

प्राथमिक विद्यालय नई कोतवाली परिसर में उगी झाड़ियां - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गंदे शौचालय और झाड़ियों से बीमारियों का खतरा
दोपहर 12:30 बजे टीम प्राथमिक विद्यालय नई कोतवाली पहुंची। नवनिर्मित भवन में सफाई थी, पर शौचालय गंदे मिले। एक ही कक्षा में पांचवीं तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई होती है। पुराना भवन ध्वस्त कर दिया गया है। मलबे में उगी झाड़ियों में विषधर निकलने की आशंका रहती है। मच्छरों के लार्वा पनपने से बच्चों पर संचारी रोगों का खतरा मंडरा रहा है। स्कूल में 35 बच्चे पढ़ रहे थे। दो शिक्षक तैनात हैं, पर प्रभारी प्रधानाध्यापक आमिर ही बच्चों को पढ़ाते मिले। 

प्रभारी प्रधानाध्यापक आमिर के मुताबिक स्कूल वर्ष 1927 से संचालित है। पुराना भवन गिरने लगा तो कायाकल्प के तहत नया भवन पिछले वर्ष बना। सफाईकर्मी नहीं है। नगर निगम के कर्मचारी शौचालय साफ नहीं करते। झाड़ियों की कटाई के लिए नगर निगम को पत्र भेजा है, पर अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। माहभर पूर्व खुद के खर्चे पर झाड़ियां कटवाई थीं, पर बारिश में ये फिर से पनप गई हैं।

साहूकारा प्राथमिक विद्यालय की दीवारों में दरार - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इमारत की पहली ईंट गिरी तो पता चला कब बना भवन
प्रभारी प्रधानाध्यापिका शकुंतला के मुताबिक, साहूकारा स्थित नवीन प्राथमिक विद्यालय का निर्माण कब हुआ, इससे संबंधित दस्तावेज स्कूल में नहीं हैं। पहली ईंट गिरी तो उस पर 1932 छपा था। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, भवन निर्माण से पूर्व कच्चे बरामदे में पढ़ाई कराई जाती थी। साहू रामनारायण की भूमि पर स्कूल संचालित है। संचालन बेसिक शिक्षा विभाग कर रहा है। वर्तमान में 65 बच्चे पंजीकृत हैं।

चटाई पर पढ़ाई खराब हो रहीं पांच वर्ष पूर्व खरीदी बेंच
स्कूल की छत कड़ियों और लकड़ी की बल्लियों पर टिकी है। इसमें दीमक लगने से ईंट गिर पड़ती हैं। वर्ष 2022 की तेज बारिश में दस्तावेज बेकार हो गए थे। कायाकल्प में शामिल न होने से भवन की मरम्मत नहीं हुई। लिहाजा, वर्ष 2019-20 में खरीदी 75 बेंच अब तक कक्षाओं में नहीं लग सकी। एक कमरे में चटाई बिछाकर कक्षा पांच तक के बच्चों की पढ़ाई हो रही है। पिछले वर्ष बरामदा गिरा था।
विज्ञापन

प्रभारी प्रधानाध्यापिका शकुंतला ने बताया कि भवन की मरम्मत के लिए कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा है। तीन दिन पूर्व बीएसए ने स्कूल का निरीक्षण किया था। जर्जर भवन देखकर आंगन में शेड लगवाने का आश्वासन दिया है। 

बीएसए संजय सिंह ने बताया कि स्कूलों के खंडहर हो चुके भवनों को अगले माह तक ध्वस्त कर दिया जाएगा। फिलहाल जर्जर कमरों को बंद कर दिया जाएगा। इसके अलावा जर्जर भवनों की मरम्मत के लिए शासन को लिखा जाएगा।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें