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UP: बरेली में 100 करोड़ के जीएसटी फर्जीवाड़े का भंडाफोड़, आरोपी फरजान गिरफ्तार, नेपाल से चला रहा था नेटवर्क

Tue, 11 Aug 2026 08:37 PM IST
Mukesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

बरेली में जीएसटी एसआईटी और कैंट थाने की पुलिस ने जीएसटी धोखाधड़ी के मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें फरजान नाम का युवक नेपाल से नेटवर्क चला रहा था। पुलिस के मुताबिक इस गिरोह ने फर्जी फर्मों के जरिए 100 करोड़ से अधिक की जीएसटी धोखाधड़ी की है। 
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जीएसटी फर्जीवाड़े के आरोपी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली में पुलिस की विशेष जांच दल (एसआईटी) ने सौ करोड़ रुपये से अधिक के जीएसटी फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया है। कैंट थाना क्षेत्र से सरगना फरजान हाशमी और उसके चार साथियों को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया। फरजान नेपाल से इस नेटवर्क को चला रहा था। वह दो साल से संदीप नाम की फर्जी पहचान से नेपाल में रह रहा था। पिछले दिनों बरेली आया था।

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पुलिस अधीक्षक क्राइम मनीष सोनकर ने बताया कि गिरोह ने विभिन्न बैंक खातों के जरिये 100 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन किया। गिरोह का जाल बरेली से दिल्ली और नेपाल तक फैला हुआ था। फरजान और उसके साथियों के खिलाफ दो साल पहले जीएसटी अधिकारियों ने किला थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस कार्रवाई के बाद फरजान नेपाल भाग गया था। वहां पहचान छिपाने के लिए -वह संदीप नाम से रह रहा था।
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पूछताछ में उसने सागर अग्रवाल को गिरोह का मुख्य सरगना बताया। गिरोह फर्जी आधार और पैन कार्ड से दर्जनों फर्में बनाता था। इन फर्मों के बीच बिना वास्तविक माल की खरीद-बिक्री के बिलों का लेनदेन दिखाया जाता था। फरजान ने बताया कि विनीत अरोरा ने उसे 50 हजार रुपये देकर एफएस ट्रेडर्स नाम से एक फर्जी फर्म खुलवाई थी। इस फर्म का उपयोग फर्जी बिल बनाने के लिए किया गया। पुलिस ने फरजान के पास से एक लैपटॉप और छह मोबाइल फोन बरामद किए हैं। 

इनकी हुई गिरफ्तारी 
किला थाना क्षेत्र के गढ्या निवासी फरजान हाशमी, कर्मचारी नगर निवासी सागर अग्रवाल, ख्वाजा कुतुब थाना कोतवाली निवासी विनीत अरोड़ा, खैरुल्ला गली निवासी अनुज अग्रवाल व नीम की चढ़ाई बड़ा बाजार निवासी शिवम गुप्ता उर्फ लाला को कैंट इलाके से गिरफ्तार किया गया है।

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जंगी एप से जुड़े थे आरोपी 
सभी आरोपी जंगी एप से जुड़े थे। इसके जरिए बातचीत का डेटा सिर्फ प्रयोग करने वाले व्यक्ति के मोबाइल फोन में ही इकट्ठा होता है। डिलीट किए जाने के बाद डेटा रिकवर कर पाना संभव नहीं हो पाता। एप से किसी को कॉल करने पर मोबाइल नंबर की जगह 10 अंक का एक दूसरा नंबर जाता है। इसके चलते इसे पूरी तरह प्राइवेसी वाला एप माना जाता है।
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