बरेली। रिंग रोड निर्माण के लिए प्रशासन ने फिर कवायद तेज कर दी है। एनएचएआई की आगरा और बरेली इकाई सर्वे का काम लगभग पूरा कर चुकी है। रिंग रोड के लिए 34 गांवों के किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया जाना प्रस्तावित है। जमीन अधिग्रहण में किसी तरह की कोई चूक न हो इसलिए अब जनप्रतिनिधियों से भी सुझाव लिए जाएंगे। चार अगस्त को प्रस्तावित बैठक में सर्वे रिपोर्ट और अधिग्रहण पर जनप्रतिनिधियों के साथ चर्चा होगी।
अफसरों के मुताबिक पहले पीडब्ल्यूडी और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) को सर्वे करने के निर्देश दिए गए थे। बाद में बदलाव कर हुए एनएचएआई की बरेली और आगरा इकाई को सर्वे करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। सर्वे रिपोर्ट के तहत करीब 41 किमी लंबे रिंग रोड के निर्माण के लिए 34 गांवों में जमीन का अधिग्रहण होगा। हालांकि, एनएचएआई से एलाइनमेंट रिपोर्ट आने पर ही किस गांव से कितनी जमीन अधिग्रहित होगी, इसकी जानकारी मिल सकेगी। बताते हैं कि सर्वे रिपोर्ट तैयार करने का काम आखिरी चरण में है। ऐसे में यह कोशिश की जा रही है कि कहां, कितनी और किसकी जमीन लेनी है, यह पहले ही तय कर लिया जाए। आशंका है कि रिपोर्ट आने के बाद अधिग्रहण को लेकर कोई आपत्ति दर्ज हो सकती है। इससे सर्वे रिपोर्ट पर सवाल उठ सकते हैं।
चार अगस्त को कलक्ट्रेट में होगी बैठक
जमीन अधिग्रहण और सर्वे रिपोर्ट पर चर्चा के लिए चार अगस्त को अफसरों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक होगी। इसमें भोजीपुरा विधायक बहोरन लाल मौर्य, फरीदपुर विधायक डॉ. श्याम बिहारी लाल, बिथरी चैनपुर विधायक राजेश मिश्र उर्फ पप्पू भरतौल और मीरगंज विधायक डॉ. डीसी वर्मा मौजूद रहेंगे। इनसे रिंग रोड के लिए जमीन अधिग्रहण आदि के संबंध में सुझाव लिए जाएंगे। प्रशासन की ओर से एडीएम (एफआर) मनोज पांडेय, विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी मदन कुमार, बाढ़ खंड एक्सईएन राजेंद्र कुमार, पीडब्ल्यूडी एक्सईएन हरवंश सिंह, संयुक्त नियोजक निर्विकार, एसडीएम आंवला प्रदीप रमन, बीडीए के एसई डीसी तोमर, एनएचएआई के उप प्रबंधक तुषार सिंह मौजूद रहेंगे।
आधा रिंग रोड पहले ही बन चुका
शहर के बाहर नैनीताल, दिल्ली और लखनऊ हाईवे को जोड़ने वाले रिंग रोड के हिस्से का निर्माण पहले ही हो चुका है। दरअसल, यह हिस्सा इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी तिराहा से जीरो प्वॉइंट तक बड़े बाईपास में शामिल है। इसका निर्माण एनएचएआई ने किया है। अब जीरो प्वॉइंट से बदायूं और बुखारा रोड होते हुए बड़ा बाईपास से इन्वर्टिस तिराहा को जोड़ने के लिए रिंग रोड का निर्माण प्रस्तावित है। इसके लिए साल 2017 में सर्वे किया गया था। करीब 41 किमी लंबे रिंग रोड के लिए 1155.83 करोड़ का बजट शासन से मंगा गया है। बता दें कि पिछले साल 30 दिसंबर को नोडल अधिकारी नवनीत सहगल ने रिंग रोड प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए कहा था। शासन से बजट स्वीकृत कराने का आश्वासन देकर सर्वे शुरू कराया था।
शहरवासियों को मिलेगी जाम से निजात
रिंग रोड के निर्माण होने से लखनऊ, दिल्ली और बदायूं की ओर आने-जाने वाला ट्रैफिक शहर के बाहर से ही गुजरेगा। शहर पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा। पीलीभीत की तरफ से आने वाले बाईपास की मदद से दिल्ली की तरफ निकल सकेंगे। वहीं, दिल्ली की ओर से आने वाले वाहन भी रिंग रोड के जरिए बदायूं रूट के शहरों की तरफ जा सकेंगे। सिर्फ जाम ही नहीं, अफसरों के मुताबिक नॉन अटेनमेंट शहरों की सूची में दर्ज बरेली से वायु प्रदूषण भी कम होने की उम्मीद है। शहर के बीच से गुजरने वाली सड़कों पर वाहनों की तादाद कम होने से उनकी मियाद भी बढ़ेगी। लोगों कम समय में ही शहर को पार कर गंतव्य पर जा सकेंगे।
इन इलाकों से गुजरेगा रिंग रोड
परसाखेड़ा से सीबीगंज होते हुए सुभाषनगर के करगैना, महेशपुरा रेलवे फाटक से होते हुए सीधे रामगंगा नदी के पास बदायूं रोड पर मिलेगा। उधर, रजउपरसपुर, रसुईया, भामपुर, अइयापुर, फरीदापुर, बरकली साहब, मौलापुर, मानपुर, चकरिया, हरहुआ, गोविंदापुर, फतेहपुर सराय, नवदिया, शहबाजपुर, अलई भगवंतपुर, जैतपुर शरीकपुर, धीरपुर, जरहाई, रकियाबाद, माधोपुर माफी समेत फतेहगंज पश्चिमी के रहपुरा जागीर आदि गांवों से होकर सीधे जीरो प्वॉइंट में मिलेगा। यहां नकटिया और रामगंगा पर दो पुल बनेंगे और दो जगहों पर ओवरब्रिज प्रस्तावित है। रबर फैक्टरी के पास शंका नदी के पास का इलाका भी जुड़ेगा।