बरेली। वर्ष 2010 में बरेली में तैनात नहीं एसपी यातायात कल्पना सक्सेना पर हमला करने वाले सिपाही रविंद्र और उसके भाई धर्मेंद्र आपराधिक पृष्ठभूमि के हैं। आईपीएस कल्पना सक्सेना ने बताया कि रविंद्र और धर्मेंद्र के उपनाम भी दबंगों वाले हैं। रविंद्र को नकटिया के नाम से भी जाना जाता है। वहीं, धर्मेंद्र को सभी टाइगर कहकर पुकारते हैं। उस दौरान अवैध वसूली करने में इनका नाम चर्चा में रहता था। फर्रुखाबाद निवासी इनका पिता मेघनाथ हिस्ट्रीशीटर था। पुलिस ने वर्ष 1989 में उसका एनकाउंटर किया था। सच मायने में ये सभी दोषी वर्दी के हकदार ही नहीं थे।
आईपीएस कल्पना सक्सेना ने बताया कि बरेली में पहली एसपी ट्रैफिक के तौर पर उनकी तैनाती हुई थी। उससे पहले बरेली में एसपी ट्रैफिक का पद नहीं होता था। उस दौरान यहां अवैध वसूली काफी बढ़ गई थी। इसे बंद कराने की मांग को लेकर शासन को लगातार पत्र भेजे जा रहे थे। इसे देखते हुए इस पद का सृजन कर उनको पहली तैनाती दी गई थी। उन्हें स्टिंग करके अवैध वसूली करने वालों पर शिकंजा कसने के निर्देश थे। इसीलिए वह धरपकड़ अभियान चला रही थीं। इसी दौरान यह वारदात हो गई।
सजा की बारी आई तो दया की भीख मांगने लगे दोषी
न्यायाधीश जब सजा सुनाने लगे तो चारों दोषी रो-रोकर दया की भीख मांगने लगे। न्यायालय कक्ष के बाहर दोषियों के परिजन भी बिलखते रहे। हालांकि, वे आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट जाने की बात भी करते रहे। एक दोषी ने न्यायाधीश से कहा कि मैंने आपको खाटूश्याम के रूप में देखा है। मुझ पर आपकी कृपा जरूर होगी।
मुरादाबाद और फर्रुखाबाद जिले के रहने वाले हैं चारों दोषी
- मुरादाबाद के थाना भगतपुर के गांव परसूपुर निवासी सिपाही मनोज कुमार।
- फर्रुखाबाद के थाना जहानगंज के गांव मूसा खिरिया निवासी सिपाही रावेंद्र सिंह।
- फर्रुखाबाद के थाना नवाबगंज के गांव नहरोसा निवासी सिपाही रविंद्र सिंह।
- फर्रुखाबाद के थाना नवाबगंज के गांव नहरोसा निवासी धर्मेंद्र सिंह।
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