बरेली। दशहरे पर दहन के लिए शहर में रावण, कुंभकर्ण व मेघनाद के पुतलों का बाजार सज चुका है। इस बार महंगाई ने पुतलों का कद घटा दिया है, पर वे पहले से अधिक डरावने हो गए हैं। इस बार बाजार में पांच से 35 फुट तक के पुतले उपलब्ध हैं, जबकि बीते वर्ष 50 फुट तक के पुतले बिके थे। इस बार लोग डरावने पुतलों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
कालीबाड़ी इलाके में रावण, कुंभकर्ण व मेघनाद के पुतले तैयार करने का काम होता है। ज्यादातर पुतले ग्राहकों के ऑर्डर पर तैयार किए गए हैं। पुतला विक्रेता हनी वर्मा ने बताया कि इस बार महंगाई की वजह से लोग छोटे पुतलों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इस बार आकार के अनुसार पुतलों की कीमत पांच हजार से 18 हजार रुपये तक रखी गई है।
चार महीने पहले शुरू हो जाती है प्रक्रिया
50 वर्षों से पुतला बनाने वाले विक्की राजपूत बताते हैं कि इसकी प्रक्रिया दशहरे से चार महीने पहले आरंभ हो जाती है। इसे बनाने के लिए पहले बांस को काटा जाता है। उससे ढांचा तैयार किया जाता है। इसके बाद उस पर रंग-बिरंगे कागज लपेटे जाते हैं। चेहरे आदि को सजाकर उसे बिक्री के लिए बाजार में रखा जाता है।
उत्तराखंड तक होती है आपूर्ति
पुतला विक्रेता प्रदीप ने बताया कि उनकी ओर से बनाए गए पुतलों की आपूर्ति आसपास के जिलों के साथ ही उत्तराखंड तक होती है। पिछले साल के मुकाबले इस बार पुतलों की बिक्री ज्यादा हुई है। रावण दहन को देखने के लिए ज्यादा दूर न जाना पड़े, इसलिए लोग अपने गली-मोहल्ले में दहन करने के लिए छोटे कद के पुतलों की खरीदारी कर रहे हैं। इस वजह से भी बिक्री में उछाल आया है। संवाद