'जो शरीयत के खिलाफ, उसे हम नहीं मानते'
उलमा ने कहा कि बैठक का मुख्य उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के संरक्षण, प्रबंधन और इसके कानूनी पहलुओं पर विचार-विमर्श करना, खासकर वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 के संबंध में जो संसद में पारित हुआ है। उलमा के साथ-साथ वकीलों ने भी सख्त लफ्जों में बिल की निंदा की और कहा कि जो शरीयत के खिलाफ हों, उसको हम नहीं मानते हैं।
जमात रजा-ए-मुस्तफा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सलमान हसन खान (सलमान मियां) ने कहा कि संविधान हमें अपने मौलिक अधिकारों के तहत वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए अपनी आवाज बुलंद करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है। संविधान का अनुच्छेद 25 और 26 हमें धार्मिक स्वतंत्रता और अपनी धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन का अधिकार देता है, जिसमें वक्फ संपत्तियों का संरक्षण भी शामिल है।
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इसके साथ ही, अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार और अनुच्छेद 21 सम्मानजनक जीवन का अधिकार सुनिश्चित करता है। भारतीय संविधान किसी भी व्यक्ति या समुदाय के मौलिक अधिकारों के हनन की अनुमति नहीं देता और वक्फ संपत्तियों पर अतिक्रमण या दुरुपयोग इसी संवैधानिक भावना के खिलाफ है। वक्फ संपत्तियां धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग हैं।
देशभर में चलाया जाएगा जागरूकता अभियान
सलमान मियां ने बताया बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इस मुद्दे को जनता के समक्ष लाने के लिए देशभर में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कार्रवाई पर भी विचार किया जाएगा। जल्द ही काजी-ए-हिंदुस्तान के आदेश पर देशभर के प्रमुख उलमा की बैठक बुलाई जाएगी।