प्लास्टिक मल्चिंग विधि का प्रयोग कर सत्यपाल ने बढ़ाई उत्पादकता
मल्चिंग और ड्रिप सिंचाई का इस्तेमाल कर मिर्च की खेती कर रहे खिरका गांव के सत्यपाल दूसरे किसानों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। सत्यपाल ने खेती में नवाचार से न सिर्फ फसल की लागत कम की है बल्कि उत्पादकता भी बढ़ाई है। सत्यपाल को देखकर अब दूसरे किसान भी खेतीबाड़ी में नई तकनीक का प्रयोग कर रहे हैं।
सत्यपाल ने बताया कि उन्होंने इस बार दो एकड़ में मिर्च की फसल लगाई है। प्लास्टिक मल्चिंग विधि का प्रयोग करने से सिंचाई और कीटनाशक पर होने वाला खर्च आधे से भी कम रह गया। मिर्च के खेत में ड्रिप इरिगेशन विधि से वह पौधों की जड़ों तक सीधे पानी पहुंचा रहे हैं। गेहूं के चार हेक्टेयर के प्लॉट में मिनी स्प्रिंकलर के जरिये सिंचाई करते हैं।
क्या है प्लास्टिक मल्चिंग
इस तकनीक में पौधों के निकट की जमीन को चारों तरफ से प्लास्टिक फिल्म से ढक दिया जाता है। इससे खेत में खरपतवार को रोकने में मदद मिलती है। वाष्पीकरण नहीं होने से नमी भी देर तक बनी रहती है।