लाभार्थियों का पैसा अटका
योजना के तहत एक आवास की कीमत 4.50 लाख रुपये निर्धारित है। इसमें केंद्रांश 1.50 लाख व राज्यांश एक लाख रुपये यानी कुल 2.50 लाख रुपये का अनुदान बिल्डर को मिलता है। शेष दो लाख रुपये के लिए बिल्डर बिडिंग करते हैं। मेगा इंफ्रा ड्रीम ने 1500 आवासों के लिए 64.50 करोड़ रुपये का काम किया। उसे 37.50 करोड़ रुपये का अनुदान मिल चुका है, जबकि लाभार्थियों से 27 करोड़ रुपये मिलने हैं। इसमें अब तक करीब नौ करोड़ रुपये ही जमा हो सके हैं। भुगतान पूरा करने वाले लाभार्थियों को आवास पर कब्जा देने की बात कही जा रही है।
पांच बार नोटिस जारी कर चुका बीडीए
बीडीए की ओर से बिल्डरों की अब तक पांच बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं। बैठकों में काम जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए गए, लेकिन परियोजनाएं रफ्तार नहीं पकड़ सकीं। बिल्डर कभी कोरोना तो कभी दूसरे कारणों का हवाला देते रहे।
24 माह में पूरा होना था काम
रेरा पंजीयन के तहत परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा किया जाना था। 24 माह में फ्लैट तैयार कर लाभार्थियों को दिए जाने थे, लेकिन आठ-नौ साल बाद भी बड़ी संख्या में परिवार अपने घर से दूर हैं। बिल्डरों की दूरी का खामियाजा गरीब परिवार भुगत रहे हैं।
बीडीए उपाध्यक्ष सौम्या पांडेय ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत एक बिल्डर ने आवास बनाकर दे दिए हैं, जबकि दो बिल्डरों के आवास अभी पूरे नहीं हुए हैं। काम पूरा कराने के लिए बिल्डरों को पांच बार नोटिस दिए जा चुके हैं।