भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री को भेजा पत्र, एफआईआर कराकर उच्चस्तरीय जांच कराएं
बरेली। वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज किए जाने के मामले में हाईकोर्ट के स्थगनादेश लेने के बाद कुछ ही दिनों राहत में रही नवाबगंज नगर पालिका की चेयरमैन शहला ताहिर फिर नई मुसीबत में फंस गई हैं। अब स्पेशल ऑडिट में नगर पालिका में 2012 से 2017 के बीच फर्जी बिलों के जरिये करीब 50 करोड़ का घपला किए जाने की पुष्टि हुई है। ऑडिट रिपोर्ट को आधार पर भाजपा नेता नीरेंद्र सिंह राठौर ने चेयरमैन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर घोटाले की जांच सीबीआई या एसआईटी से जांच कराने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है।
नगर पालिका नवाबगंज को लेकर भाजपा नेता ने चेयरमैन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तमाम गड़बड़ी और घोटालों की शिकायत की थी। इसके बाद विशेष संपरीक्षा विभाग ने इसकी जांच की तो तमाम घपलों और घोटालों का पर्दाफाश हुआ। जुलाई में तैयार हुई जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि बैंक स्टेटमेंट देखने से यह पता चला है कि एसबीआई के खाते से कैश प्रेस के तौर पर 50 लाख रुपये से ज्यादा धनराशि निकाली गई थी। कैश प्रेस का मतलब, वह धनराशि जो संबंधित व्यक्ति को प्राप्त नहीं हुई है। रिकार्ड में इसकी स्थिति स्पष्ट नहीं मिली। इसके अलावा नगर पालिका की 29.97 करोड़ से ज्यादा की धनराशि एसबीआई, पीएनबी सहित आठ विभिन्न बैंकों से निकालकर व्यय की गई, लेकिन इसका रिकार्ड न मिल पाने से इसकी जांच नहीं हो सकी है। इसके अलावा जांच में ठेका सफाई में अनियमित भुगतान, कब्रिस्तान के सौंदर्यीकरण के नाम पर फर्जीवाड़ा, हैंडपंप की मरम्मत में फर्जीवाड़ा, सोलर लाइटों की खरीद सहित तमाम अन्य मदों में वित्तीय गड़बड़ियां सामने आई हैं। पूरा घोटाला 50 करोड़ से ज्यादा का बताया जा रहा है। इस संबंध में शहला ताहिर का पक्ष लेने के लिए उन्हें कई बार फोन किया गया लेकिन उन्होंने फोन रिसीव ही नहीं किया।
दुकानों की नीलामी प्रक्रिया में भी तमाम गड़बड़ियां
वर्ष 2016-17 में नगर पालिका की नवनिर्मित 36 दुकानों की नीलामी प्रक्रिया में भी गंभीर गड़बड़ी सामने आई है। शिकायत की गई थी कि दुकानों के आवंटन के लिए तीन नीलामी बोलीदाताओं के बजाय सिर्फ एक व्यक्ति से ही जमानत राशि जमा कराकर नियम विरुद्घ दुकानें दे दी गई थीं। इतना ही नहीं कुछ लोगों को नीलामी में शामिल किए बगैर ही दुकानें दे दी गईं थीं। हाईवे के किनारे कई कीमती दुकानों को भी कम कीमत पर आवंटित कर दिया गया। जांच में अन्य दुकानों के आवंटन में भी घपले सामने आए हैं।
पार्किंग ठेके की नीलामी में भी मनमानी
वर्ष 2017-18 में हुए पार्किंग ठेके को लेकर भी 2.99 लाख की शिकायत की जांच में सामने आया है कि ठेके की नीलामी से प्राप्त किसी भी धनराशि के पालिका के पास जमा होने का रिकार्ड नहीं मिला है। यहां तक कि नीलामी प्रक्रिया में भाग लेने वाले ठेकेदारों की जमा धनराशि के साक्ष्य और रसीदों की संख्या भी अंकित नहीं मिली है।
आईटीआर लगाकर मांगी गई जांच रिपोर्ट
शिकायतकर्ता नीरेंद्र सिंह राठौर ने स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग (प्रयागराज) से सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी। इस पर उन्हें यह जांच रिपोर्ट मिली है। जन सूचना अधिकारी ने 14 नवंबर को साक्ष्यों के साथ ये जानकारियां उपलब्ध कराई हैं।