बरेली। इस्लाम की बुराइयां गिनाने पर मेरा हक फाउंडेशन की अध्यक्ष फरहत नकवी पर उलमा और मुस्लिम संगठनों के निशाने पर आ गई हैं। उलमा का कहना है कि फरहत नकवी ऐसे बयान दे रही हैं जैसे उन्होंने मजहब बदल लिया हो और इमाम हुसैन को मानना छोड़ दिया हो। वह उन लोगों का साथ दे रही हैं जो इस्लाम के मुखालिफ हैं। उलमा ने ये सवाल फरहत के तीन तलाक पीड़ित महिलाओं के साथ विजयीदशमी पर दस बुराइयों का पुतला दहन करने का बयान दिया था। इनमें इस्लाम से जुड़े कुछ मुद्दे भी हैं। उलमा और मुस्लिम संगठनों की प्रतिक्रिया है कि यूं तो फरहत भी उन इमाम हुसैन को मानने वाली हैं जिन्होंने इस्लाम को बचाने के लिए कुर्बानी दे दी थी, लेकिन वह जिस तरह इस्लाम पर किसी न किसी बहाने सवाल खड़ी रही हैं, उससे उनकी मंशा पर ही शुबहा पैदा हो रहा है।
राष्ट्रीय उलमा कौंसिल के अध्यक्ष मौलाना इंतजार अहमद कादरी ने फरहत के बयान पर कहा है कि अगर किसी को अपना मजहब समझ नहीं आ रहा तो वह उसे बदल सकता है, लेकिन जब तक जिस मजहब में रहे, तब तक उसके उसूलों को भी मानना चाहिए। आल मुस्लिम राबता कमेटी के अध्यक्ष हामिद लतीफ बब्बू ने कहा कि किसी पीड़ित की न्याय के लिए मदद करना अच्छी बात है मगर मदद के बहाने एक मजहब को बार-बार निशाना बनाना गलत है। फरहत तीन तलाक और हलाला के बहाने इस्लाम को बदनाम करना चाहती हैं। मुस्लिम राष्ट्रवादी सेवक संघ के अध्यक्ष डॉ. मुहम्मद खालिद ने कहा कि फरहत इस्लाम की खामियां निकालती रहती हैं। वह उन लोगों में शामिल हैं जो अपने फायदे के लिए ऐसा करते हैं। हो सकता है फरहत भी राजनीतिक लाभ के लिए ऐसा कर रही हैं लेकिन कोई भी शख्स अपने मजहब का दुष्प्रचार कर कोई लाभ नहीं उठा सकता।
दस कुप्रथा पर जो बयान दिया है, वह सिर्फ इस्लाम से जुड़ी नहीं हैं, दूसरे समाज की भी हैं। हमारा मुद्दा महिलाओं से जुड़ा है इस्लाम से नहीं। महिलाओं के गुनहगारों से हमारी लड़ाई है। - फरहत नकवी, अध्यक्ष मेरा हक फाउंडेशन