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नक्शा चोरों को तलाशने के बजाय सेना पर असहयोग का इल्जाम

Mon, 07 May 2018 06:40 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
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यूपी पुलिस
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सेना के एलओसी (लाइन ऑफ कंट्रोल) को अति गोपनीय नक्शों की चोरी के मामले की जांच भी पुलिस ने चोरी के आम मामलों की तरह निपटा डाली। बीआई बाजार स्थित फोटोस्टेट शॉप के मालिक के मुताबिक जो दो बाबर्दी सैनिक नक्शों की कॉपी कराने उसकी दुकान पर पहुंचे थे, चार महीनों की छानबीन के बाद भी पुलिस उनका पता नहीं लगा सकी। अब इस मामले को फाइनल रिपोर्ट लगाकर बंद करने की तैयारी की जा रही है। फाइनल रिपोर्ट तैयार कर एप्रूवल के लिए सीओ को भेज दी गई है। यानी पुलिस ने नक्शों की चोरी के इस मामले को ही गलत साबित कर दिया है। अपनी नाकामी को छिपाने के लिए पुलिस सेना पर असहयोग का इल्जाम पहले ही मढ़ चुकी है। 
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 कैंट के बीआई बाजार की एक फोटोस्टेट की दुकान पर 24 जनवरी को एलओसी के नक्शे बरामद होने के बाद सेना ही नहीं, पुलिस और प्रशासन में भी हड़कंप मच गया था। फोटो स्टेट की इस दुकान के मालिक के मुताबिक दो सेना की वर्दी पहने दो लोग करीब 40 पन्नों के ये दस्तावेज लेकर उसकी दुकान पर पहुंचे थे और उससे नक्शों की फोटो कॉपी करने को कहा था। इसी बीच किसी तरह सेना को इसकी भनक लग गई, लेकिन सेना के एक्शन में आने से पहले ही दोनों वर्दीधारी नक्शों को दुकान पर ही छोड़कर फरार हो गए थे। पुलिस और मिलिट्री इंटेलीजेंस दोनों काफी कोशिश के बावजूद उन दोनों को पकड़ने में कामयाब नहीं हो पाई। दुकान पर मिले नक्शों को सैन्य अधिकारियों ने अपने कब्जे में ले लिया था।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी छानबीन में एटीएस, एलआईयू, आर्मी इंटेलीजेंस समेत तमाम जांच एजेंसियां छानबीन में जुट गई थी। ये नक्शे भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा के थे। पूछताछ में पता चला था कि इन नक्शों में भारत की चेक पोस्टों की जानकारी थी। इस मामले में सेना ने प्रारंभिक तौर पर खुद जांच की और इसके बाद सेना के हवलदार प्रभात कुमार शाही की तरफ  से  शासकीय गुप्त बात अधिनियम 2005 के तहत सरकारी दस्तावेजों से छेड़छाड़, उनकी नकल कराने के आरोपों में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने करीब चार महीनों तक इस मामले में छानबीन की, लेकिन घटना से जुड़ा कोई भी सुराग नहीं जुटा सकी। अब पुलिस ने इस मामले को फाइनल रिपोर्ट लगाकर बंद करने की तैयारी कर ली है।
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लगातार कहते रहे- सेना नहीं कर रही मदद
पुलिस ने मामले की जांच करते ही यह कहना शुरू कर दिया था कि छानबीन करने में सेना की ओर से उन्हें कोई सहयोग नहीं किया जा रहा है। दरअसल पुलिस चाहती थी कि जिस फोटोस्टेट की दुकान पर नक्शों को कॉपी कराने के लिए लाया गया था, उसके दुकानदार के आगे सेना के जवानों की शिनाख्त परेड कराई जाए, लेकिन सेना के अफसर इसके लिए तैयार नहीं हुए। पुलिस और एटीएस की ओर से कई बार उन चुराए गए नक्शों की जांच की भी कोशिश की गई जो दुकान पर लाए गए थे, लेकिन सेना ने नक्शों को बेहद गोपनीय बताते हुए उन्हें भी पुलिस के सुपुर्द नहीं किया। आखिरकार पुलिस ने सेना पर असहयोग का इल्जाम लगाते हुए यही मान लिया कि नक्शे चोरी ही नहीं हुए थे।
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