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अवकाश की आड़ में आका से ट्रांसफर रुकवाने की जोड़तोड़

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बरेली। सरकारी योजनाओं में घपलों-घोटालों के लिए चर्चित नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) एक बार फिर चर्चा में है। इस बार यह चर्चा सपा सरकार से भाजपा की दो साल से ज्यादा की सरकार में जमे पीओ विनय कुमार सिंह के तबादले को लेकर है। संभल तबादला होने जाने के बाद पीओ डूडा तकनीकी तौर पर तो अवकाश पर हैं, लेकिन विभागीय कर्मचारियों की बात पर भरोसा करें तो वह बरेली में अपना ट्रांसफर रुकवाने की जुगाड़ में लगे हैं। पीओ अपना सीयूजी नंबर एपीओ राकेश कुमार के पास छोड़ गए हैं।
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सपा सरकार के समय वर्ष 2016 में बरेली आए पीओ डूडा विनय कुमार की उस समय शासन में तगड़ी पकड़ थी। सपा सरकार में पीओ ने जैसे चाहा, वैसे डूडा चलाया। फिर चाहे वह सरकार की गरीबों को मुफ्त रिक्शा वितरण योजना में गोलमाल हो या फिर गरीबों को ‘आसरा’ योजना में मकान देने में लेटलतीफी। वर्ष 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद पीओ के ट्रांसफर की चर्चा चली तो उन्होंने एक भाजपा नेता को अपना आका बना लिया। उनके संरक्षण में ही बरेली में जमे रहे। साढ़े छह करोड़ के टेंडर विवाद से चर्चा में आए पीओ डूडा का 28 जुलाई को शासन ने संभल तबादला कर दिया। पहले तो वह दो से तीन दिन तक तबादला आर्डर ही छुपाए रहे। जब वह सार्वजनिक हो गया तो अवकाश के बहाने लखनऊ जाकर तबादला रुकवाने की जोड़तोड़ में लग गए। अभी बरेली भेजे गए नए पीओ शैलेंद्र भूषण ने भी ज्वाइन नहीं किया है।
सूत्रों की मानें तो संभल ज्वाइन न करने पर पीओ डूडा से शासन ने स्पष्टीकरण भी मांगा है, लेकिन स्पष्टीकरण आदेश भी बाबुओं ने दबा लिया है। पीओ डूडा फिलहाल अवकाश पर हैं। पीओ का सीयूजी नंबर एपीओ राकेश कुमार के पास है। डूडा में समस्त सरकार की गरीबों के हित में चलाई जाने वाली पीएम आवास, शहरी ऋण वितरण समेत ज्यादातर योजनाओं का काम ठप है।
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पीओ अवकाश पर चले गए हैं। शासन ने उनका ट्रांसफर संभल कर दिया गया है। अभी वह न तो रिलीव हुए हैं, न ही नए साहब ने ज्वाइन किया है। सीयूजी नंबर मेरे पास है। डूडा में कामकाज की प्रगति के बारे में कुछ नहीं बता सकता।
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- राकेश कुमार, एपीओ डूडा
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