बरेली के फाइक एन्क्लेव में बीते 30 वर्षों में सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर कई जगह अवैध कब्जे हो गए। तत्कालीन अधिकारी और कर्मचारी चुप रहे। किसी भी अवैध कब्जेदार को नोटिस तक नहीं दिया गया। जिन जमीनों पर अवैध कब्जे हुए, उनमें से कुछ के अभिलेख तक गायब हो गए हैं। जांच में इस तरह के कई मामले सामने आए हैं।
मंडलायुक्त से शिकायत हुई तो मुख्य विकास अधिकारी को जांच सौंपी गई है। राजस्व कर्मियों और तहसीलदार को साथ लेकर मुख्य विकास अधिकारी फाइक एन्क्लेव पहुंचे। वहां अवैध कब्जों की पड़ताल की। सार्वजनिक जमीन के कई हिस्सों में मकान बन गए हैं। वर्तमान में इस जमीन की कीमत करोड़ों रुपये हो गई है। कुछ कब्जेदार तो कब्जा बनाए रखने के लिए कोर्ट चले गए हैं। वहीं, कई कब्जेदार बचाव का रास्ता तलाशते हुए उन लोगों से संपर्क कर रहे हैं, जिनसे उन्होंने भूखंड खरीदे थे।
अब तक जो स्थिति सामने आई है, उसके मुताबिक तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ क्रेता और विक्रेता की जिम्मेदारी तय हो सकती है। अवैध तरीके से सीलिंग, तालाब और सार्वजनिक उपयोग की जमीन हथियाने का आरोप सामने है। मुख्य विकास अधिकारी जग प्रवेश ने जांच के विषय में कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया। उन्होंने बताया कि मंडलायुक्त के आदेश पर जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट दो दिन में उन्हें सौंपी जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर मंडलायुक्त ही कार्रवाई कराएंगी।