पीलीभीत। पुलिस के रिकॉर्ड में भले ही तस्कर बाबू मादक पदार्थ का शातिर तस्कर और हिस्ट्रीशीटर हो। थाने से भागने के बाद उसकी धरपकड़ के अफसर दावे करें, लेकिन अब तस्कर के एक पैंतरे ने पुलिस को चकरा दिया है। उसने कानूनी कार्रवाई को लेकर बरती गई लापरवाही का फायदा उठाकर पुलिस को घेरने की कोशिश की है। उसने समर्पण के लिए अर्जी लगा दी है, मगर पुलिस के पास कोर्ट को देने के लिए कोई जवाब नहीं है।
स्वाट टीम ने पिछले वर्ष 15 नवंबर को मोहल्ला मदीनाशाह निवासी तस्कर बाबू को पकड़कर सुनगढ़ी पुलिस के हवाले किया था। पांच सौ ग्राम चरस की बरामदगी का दावा भी किया गया। सुनगढ़ी में उसकी कोई लिखापढ़ी नहीं की गई थी और उसी रात बाबू रहस्यमय ढंग से थाने से भाग गया। दो पुलिसकर्मी निलंबित हुए और कुछ दिन में ही बहाल हो गए। बाबू के मामले को अफसर दबा गए। पांच जनवरी को अमर उजाला ने प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया तो खलबली मच गई। अफसरों ने धरपकड़ को लगाई टीमों की कार्रवाई नाफाफी होना स्वीकारा और फिर धरपकड़ के दावे किए। इसका अभी कोई खास असर नहीं दिखा था, मगर बाबू ने अब बचने के लिए सीजेएम न्यायालय में आत्मसमर्पण के लिए अर्जी डाल दी। इसको लेकर कोर्ट ने पुलिस से रिपोर्ट मांगी। अब आलम यह है कि पुलिस किस अपराध में वांछित बताए और सरेंडर कराए। कोई जवाब पुलिस पर नहीं है। पुलिस बगले झांक रही है। फायदा जरूर तस्कर बाबू को मिलना है। इंस्पेक्टर सुनगढ़ी राजेश कुमार ने बताया कि बाबू की सरेंडर एप्लिकेशन पड़ी है, इसको लेकर रिपोर्ट मांगी गई है।
...तो इसके पीछे भी मददगार पुलिस वाले
तस्कर बाबू के भागने की घटना के बाद उसकी मदद करने वालों में कुछ पुलिसकर्मी भी चर्चा में है। एसपी ने जब धरपकड़ के निर्देश टीम को दिए थे। इसी दौरान एक और बात हो रही थी कि कुछ पुलिसकर्मी ही बाबू को बचाने के लिए राय दे रहे थे। उसको किसी पुराने मामले की जमानत तुड़वाकर या फिर सरेंडर एप्लिकेशन डालने की राय दी जा रही थी। इसे महज चर्चा माना गया था लेकिन अब यही हुआ।
बाबू पर 20, उसके भाई पर 14 मुकदमे
बाबू के आपराधिक इतिहास की बात करें तो लंबी फेहरिस्त है। 20 मुकदमे उस पर दर्ज है। इसमें अधिकांश एनडीपीएस एक्ट के है। तीन बार गुंडा एक्ट लग चुका है। कोतवाली का हिस्ट्रीशीटर भी है। उसका भाई इकबाल भी अपराधी है। उस पर एनडीपीएस समेत अन्य धाराओं में करीब 14 मुक़दमे हैं। यहां तक कहा जा रहा है कि थाने से भागने के बाद पुलिस उसे भले ना पकड़ पाई हो, मगर उसके धंधे पर भी ज्यादा फर्क नहीं पड़ा है।
गुरुवार शाम को कोतवाल श्रीकांत द्विवेदी ने पुलिस बल के साथ अचानक बाबू के घर दबिश दी। पुलिस मकान में आगे के गेट से घुसी। इसी बीच घर पर मौजूद महिला पीछे के गेट से भाग गईं। मौके से पुलिस को कुछ नहीं मिला। इलाके में कार्रवाई से हड़कंप मचा रहा। कोतवाल ने बताया कि चूंकि बाबू हिस्ट्रीशीटर है इसलिए उसकी निगरानी के तहत दबिश दी गयी थी।
बाबू के मामले में सरेंडर एप्लिकेशन में जवाब भेजा जाएगा। यह पेशबंदी में किया गया है। उसको लेकर टीम कार्रवाई कर रही है। - रोहित मिश्र, एएसपी