फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जीत गए चनहेटी वाले, शराब ठेका बंद

Sat, 16 May 2015 01:26 AM IST
बरेली
विज्ञापन
विज्ञापन
 चनेहटी के लोग आखिर लड़ाई जीत गए। बस्तू के बीच और स्कूल के पास खुली पोंटी ग्रुप की शराब दुकान आखिर बंद हो गई है। यहां की महिलाओं ने  लिखित में बंदी आदेश देखने के बाद आंदोलन खत्म कर जश्न मनाया।
विज्ञापन

 शुक्रवार सुबह दुकान खोलकर बिक्री शुरू की गई तो आंदोलनकारियों ने आबकारी अधिकारी आनंद शंकर राय  को फोन पर सूचना दी। थोड़ी ही देर में दुकान पर ताला लगा दिया गया। इससे पहले एक वैन में शराब के क्वार्टर भर लिए गए। पहले वैन को रेलवे स्टेशन रोड की तरफ खड़ा किया गया। इस पर आरपीएफ ने ऐतराज कर दिया तो बरकलीगंज रोड पर बाजार से करीब दो सौ मीटर दूर वैन खड़ी करके शराब बेची गई। इस बीच दामोदर पार्क में भूख हड़ताल जारी रही। शाम करीब पांच बजे श्री राय पार्क में पहुंचे और आंदोलनकारियों को अपना वह पत्र सौंपा जिसमें जनविरोध को देखते हुए ठेकेदार को दुकान तत्काल प्रभाव से बंद करने का निर्देश दिया गया है। इसमें दुकान की व्यवस्था न होने तक मोबाइल वैन या किसी अन्य वाहन से शराब बिक्री की बात कही गई। इसके बाद आंदोलन खत्म करने की घोषणा हुई। श्री राय ने भूख हड़ताल कर रहीं महिलाओं को कोल्डड्रिंक पिलाई। इन लोगों ने एकदूसरे को फूलमालाएं पहनाकर जीत का जश्न मनाया और मिठाई खिलाई।

वर्जन
अब पुरानी दुकान पर शराब बिक्री नहीं होगी। जनता की भावनाओं को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। ठेकेदार फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था से शराब बेचेंगे, बाद में कहीं गैर विवादित जगह शिफ्ट कर लेंगे। - आनंद शंकर राय, जिला आबकारी अधिकारी
विज्ञापन


आंदोलनकारियों की बात
- गांव में फसाद और मौतों की जड़ बनी शराब दुकान को हटाने का फैसला देर से सही पर ग्रामीणों के हक में हुआ। आबकारी विभाग का बस चलता तो ठेका न हटता, डीएम की सख्ती काम आई। - आर्येंद्र मिश्रा, संघर्ष समिति संयोजक

- यह महिला शक्ति की जीत है। अपना घरबार छोड़कर महिलाओं ने जो हिम्मत दिखाई वो काबिलेतारीफ है, अब कुछ और सकारात्मक आंदोलन किए जाएंगे। - सुमन उपाध्याय

- ग्रामीणों के साथ आम आदमी पार्टी आखिरी वक्त तक खड़ी रही। तमाम राजनैतिक दलों ने हमसे दूरियां बना लीं। समाजसेवियों और अमर उजाला ने हमारी लड़ाई को धार दी, उनका शुक्रिया। - मोहम्मद रजा

- धरना खत्म होने का मतलब यह न समझा जाए कि दुकान दोबारा खोलने पर विरोध न होगा। अगर दुकान खोलने की कोशिश हुई तो दुगनी ताकत से हम लोग आमरण अनशन करेंगे। - हरीश गंगवार
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें