लगातार बढ़ता प्रदूषण सिर्फ मनुष्यों को ही नहीं जीव- जंतुओं को भी बीमार बना रहा है। उनके स्वभाव में परिवर्तन देखा जा रहा है। जहां ज्यादा प्रदूषण है वहां के जीव-जंतुओं में चिड़चिड़ापन और गुस्से की प्रवृत्ति देखी जा रही है। इसके अलावा कई गंभीर रोगों के शिकार हो रहे हैं।
यह बात आईवीआरआई के डायरेक्टर डॉ. आरके सिंह ने कही। वह बुधवार को संस्थान में हैवी मेटल पॉल्यूटेंट्स इन इन्वायरन्मेंट इफेक्ट ऑन एनीमल एंड मिटिगेशन विषय पर आयोजित समर स्कूल में बोल रहे थे। उन्होंने 21 दिवसीय इस समर स्कूल का उद्घाटन किया, जिसमें 12 राज्यों के 24 वैज्ञानिक और प्रोफेसर भाग ले रहे हैं। इनमें उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, उड़ीसा, मध्यप्रदेश, राजस्थान, केरल, महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, छत्तीसगढ़ और पंजाब शामिल हैं। यह कार्यशाला भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से आयोजित की गई है। इसमें व्याख्यान के लिए औद्योगिक शोध परिषद और वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के विशेषज्ञ भी आए हैं। डॉ. सिंह ने कहा कि मानव ने अपनी सुख-सुविधाओं में वृद्धि के लिए अंधाधुंध औद्योगिकीकरण और परिवहन के साधन जुटाए हैं। इससे वातावरण के अंदर भारी धातुओं की मात्रा में निरंतर वृद्धि हो रही है। इससे पर्यावरण लगातार प्रभावित हो रहा है। इसके लिए सबको चिंता करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों को प्रदूषण से प्रभावित जीवों की स्वास्थ्य समस्याओं के प्रबंधन करने होंगे। संस्थान के औषधि विभाग के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सहदेव डे ने कहा कि भारत में प्रदूषण का स्तर चेतावनी की स्थिति में आ गया है। इससे खाद्य पदार्थ भी प्रदूषित हो रहे हैं। समर स्कूल के उद्घाटन के मौके पर औषधि विभाग के हेड डॉ. उमेश डिमरी, पशु रोग शोध एवं निदान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एजी तेलंग, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एसके दीक्षित और डॉ. सुमित महाजन ने भी विचार रखे।