खराब मौसम की मार पड़ने के बाद पिछले साल 1516 लोगोें ने खेत में ही जोत दी थी फसल
विज्ञापन
इस बार मौसम ने दिया साथ तो हुई पिछले साल से दस गुना उपज
बरेली। मौसम अनुकूल न होने की वजह से पिछले साल 1516 लाइसेंसधारक किसानों को अपनी अफीम की फसल खेत में ही जोतनी पड़ी थी लेकिन इस बार अफीम की उपज ने इस नुकसान की भरपाई कर दी। नॉरकोटिक्स विभाग के मुताबिक इस बार पिछले साल की तुलना में दस गुना से भी ज्यादा पैदावार हुई है।
बरेली नारकोटिक्स कार्यालय के अंतर्गत आने वाले बरेली, बदायूं और शाहजहांपुर जिलों में 1780 लोगों ने अफीम की खेती का लाइसेंस ले रखा है। पिछले साल इनमें से 1634 लाइसेंसधारकों ने अफीम की फसल की थी लेकिन मौसम खराब होने से पैदावार न होने की आशंका देखते हुए 1516 लाइसेंसधारकों ने विभाग की देखरेख में फसल नष्ट करा दी। 118 किसानों ने हिम्मत दिखाकर फल आने के बाद चीरा लगाया लेकिन उनके खेतों में भी सिर्फ पांच क्विंटल अफीम की पैदावार हुई।
नारकोटिक्स विभाग के इंस्पेक्टर महेश सिंह के मुताबिक इस बार मौसम अफीम की खेती के अनुकूल रहा। सात लाइसेंसधारकों को छोड़कर बाकी सभी 1673 ने 84 हेक्टेअर जमीन में फसल पैदा की और सभी ने इसमें चीरा भी लगाया। फल से अफीम निकालने के बाद उसे जमा किया गया तो इसका वजन 55.95 क्विंटल था जो पिछले साल से दस गुना से भी ज्यादा है।
रात का ठंडा मौसम अफीम के लिए अनुकूल
महेश सिंह के मुताबिक अक्तूबर-नवंबर तक अफीम की खेती के लिए बोआई होती है और मार्च तक फल तैयार होने पर उसमें चीरा लगाया जाता है। इसके लिए दिन मेें भले ही मौसम कुछ गर्म रहे लेकिन रातें ठंडी होनी चाहिए। पिछले साल आंधी-बारिश की वजह से ये फसल बर्बाद हो गई थी लेकिन इस बार इन दिनों में रातें ठंडी रहीं, जिसके चलते ही फसल अच्छी हुई है।