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ऑपरेशन काला गुलाब...शराब के काले धंधे में शामिल सफेदपोशों को करेगा बेनकाब

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अजय जायसवाल का मकान।
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आईजी ने एसएसपी और इंटेलिजेंस ब्यूरो के एसपी को दिए प्रमाण जुटाने और कार्रवाई करने के निर्देश
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इनामी मनोज की अफसरों से मिलवाने में सामाजिक संगठन की भूमिका सामने आने के बाद फैसला
बरेली। सौ करोड़ की एक्साइज ड्यूटी चोरी कर फरार 25 हजार के इनामी अपराधी की तत्कालीन डीएम से मुलाकात कराने वाले तथाकथित सामाजिक संगठन को सीधे तौर पर तो कानूनी जांच में शामिल नहीं किया गया है लेकिन शराब के अवैध कारोबार में सफेदपोशों और अफसरों की भूमिका की जांच शुरू हो गई है। इस ऑपरेशन को ‘काला गुलाब’ नाम देकर आईजी ने एसएसपी और आईबी को ऐसे सफेदपोशों के बारे में प्रमाण जुटाने का निर्देश दिया है।
सहारनपुर की टपरी डिस्टिलरी में करीब सौ करोड़ की टैक्स चोरी का खुलासा होने के बाद बरेली के शराब कारोबारी मनोज जायसवाल का नाम इस मामले में मास्टर माइंड के तौर पर सामने आया था। पूरे मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने मनोज जायसवाल की गिरफ्तारी पर 25 हजार का इनाम घोषित किया था। बरेली में उसके दो बार 21 डाउन टाउन और तमाशा को भी लाइसेंस निलंबित कर सील कर दिया गया था। मनोज जायसवाल को एसआईटी ने 28 जनवरी को लखनऊ में गिरफ्तार कर लिया।
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ऐन मनोज की गिरफ्तारी वाले दिन एक फोटो भी वायरल हुआ जिसमें मनोज जायसवाल एक कार्यक्रम में तत्कालीन डीएम मानवेंद्र सिंह के साथ एक ही टेबल पर बैठा दिख रहा था। यह कार्यक्रम गरीब बच्चों की मदद के लिए एक सामाजिक संगठन की ओर से आयोजित किया गया था। तत्कालीन डीएम के साथ बैठा मनोज जायसवाल फरार घोषित था और उस पर 25 हजार का इनाम भी था। इसी दौरान डीएम ने शासन की अनुमति के बगैर उसके दोनों बार की सील भी खुलवा दी थी, लिहाजा यह साफ हो गया कि मनोज जायसवाल के लिए प्रशासन के अफसरों से यह लाइजनिंग सामाजिक संगठन ने ही कराई थी।
इनामी अपराधी को अपने कार्यक्रम में बुलाने और प्रशासनिक अफसरों से मुलाकात कराने के मामले की अलग से तो जांच शुरू नहीं हुई लेकिन आईजी रमित शर्मा ने शराब के अवैध कारोबार में सफेदपोशों और अफसरों की भूमिका की जांच के लिए एसएसपी रोहित सिंह सजवाण के अलावा इंटेलिजेंस ब्यूरो के एसपी यमुना प्रसाद को पत्र लिखा है। इस ऑपरेशन को काला गुलाब नाम दिया गया है।

शराब दुकानों की भी होगी चेकिंग
ऑपरेशन काला गुलाब के दौरान सफेदपोशों और अफसरों की भूमिका की जांच के साथ शराब की दुकानों पर स्टॉक और मिलावट आदि की भी जांच की जाएगी। दरअसल पिछले साल टपरी डिस्टिलरी सील होने के बाद वहां से आई शराब का एक ट्रक बरेली में पकड़ा गया था। यह शराब भी मनोज जायसवाल ने ही मंगाई थी। आशंका है कि ऐसी ही और शराब दुकानों पर हो सकती है।

रात की पार्टियों के मुरीद रहे हैं कई अफसर
बड़े अधिकारियों की नजदीकियां हासिल करने के लिए शहर में रात को होने वाली पार्टियां गाहे-बगाहे चर्चा में रहती हैं। आयोजक इन पार्टियों में अधिकारियों को बुलाने के बहाने ढूंढते हैं तो अधिकारी भी पार्टी में आने के लिए आतुर रहते हैं। गरीब बच्चों की मदद के बहाने सामाजिक संगठन की ऐसी ही एक पार्टी में तत्कालीन डीएम से 25 हजार के इनामी मनोज जायसवाल से मुलाकात कराई गई थी। हालांकि शहर में अपनी तरह का यह पहला मामला नहीं था। 2017-18 में पुलिस के एक बड़े अधिकारी के बंगले पर हुई होली की पार्टी में एक गंभीर केस में वांछित शख्स खुलेआम शामिल हुआ। 2012-13 में एक अधिकारी रात की पार्टियों का लुत्फ उठाने के लिए काफी चर्चित रहे थे। बता दें कि मनोज जायसवाल की डीएम से मुलाकात का जो फोटो वायरल हुआ, उसमें एक तीसरा शख्स भी है जो शराब कारोबारियों की अफसरों से लाइजनिंग कराने के लिए जाना जाता है। गिरफ्तारी के बाद खुद मनोज जायसवाल ने एसआईटी को बताया कि उसके 21 डाउन टाउन बार और रेस्टोरेंट में तमाम अधिकारियों का भी आना-जाना था। हालांकि इस बार में सिर्फ जोड़ों को ही आने की इजाजत है।

ऑपरेशन काला गुलाब के तहत अवैध शराब के खिलाफ अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। इससे जुड़े लोगों के बारे में प्रमाण इकट्ठे करने के बाद कार्रवाई की जाएगी। शराब की दुकानों की भी नियमित चेकिंग करने को कहा गया है। - रमित शर्मा, आईजी

गुलाम किस्मत... करोड़ों का साम्राज्य पर जेब में सिर्फ चार सौ रुपये और पैरों में फटे जूते
बरेली। यह तो अजय जायसवाल की गिरफ्तारी के फौरन बाद पता लग गया था कि वह कोई अरबपति नहीं बल्कि शराब कारोबारी मनोज जायसवाल का मामूली गुर्गा था लेकिन उसकी कहानी कहीं और ज्यादा दर्दनाक है। मनोज अपने कई शराब गोदामों और तमाम दुकानों का अजय को मालिक बनाकर करोड़ों कमाता रहा लेकिन उसे उसने सहूलियत भरी जिंदगी जीने तक का मौका नहीं दिया। एसटीएफ ने जब उसे सोमवार को गिरफ्तार किया तो उसकी जेब में सिर्फ चार सौ रुपये और पैरों में फटे जूते थे।
सहारनपुर की टपरी डिस्टिलरी में सौ करोड़ की टैक्स चोरी के बाद अब तक पुलिस, एसटीएफ से लेकर ईडी और एसआईटी तक यही माना जा रहा था कि अजय जायसवाल की माली हैसियत अरबों में हो सकती है, लेकिन एसआईटी की पूछताछ में उसने बताया कि उसे पता ही नहीं है कि बरेली, कानपुर और उन्नाव समेत कई शहरों में उसके नाम शराब के कई गोदाम और तमाम दुकानें हैं। अजय ने बताया कि 2017 में मनोज ने उससे उसका आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटो ले लिए थे। इन्हीं का इस्तेमाल कर उसने शराब गोदामों और दुकानों के लाइसेंस लिए लेकिन उसे कुछ नहीं बताया। अजय ने बताया कि उसने आज तक उन्नाव और कानपुर की शक्ल तक नहीं देखी है।

तंगी से परेशान होकर मांगा था काम मनोज ने करा दिया काम तमाम
अजय जायसवाल ने बताया कि वह मूल रूप से भमोरा के बल्लिया गांव का रहने वाला है। वहां उसकी पुश्तैनी सात बीघा जमीन और सोने चांदी की छोटी सी दुकान थी जो नहीं चली तो उसने 2004 में गांव छोड़ दिया और यहां बन्नूवाल कॉलोनी में रहने वाली रीता से शादी कर 30 गज का छोटा सा घर बना लिया। घर के नीचे परचूनी की दुकान खोली और ऊपरी हिस्से में रहने लगा। उसके दो बेटी और एक बेटा है। 2016 में तंगहाली की वजह से पत्नी से विवाद होने के बाद दोनों अलग हो गए। शराब कारोबारी मनोज जायसवाल उसका रिश्तेदार है। घर में खाने के लाले पड़े तो वह उसके पास काम मांगने पहुंचा। मनोज ने उसे 15 हजार रुपये की नौकरी देकर आंवला क्षेत्र में अपनी एक अंग्रेजी और चार देसी शराब दुकानों की देखरेख का काम दे दिया।

अरबपति समझकर छह महीने पहले ईडी ने भी मारा था छापा
हर किसी को यही पता था कि शराब के ठेकों का मालिक अजय जायसवाल है। इसी धोखे में ईडी ने भी छह महीने पहले अजय जायसवाल के घर पर दबिश दी थी मगर उसके घर में कुछ नहीं मिला। जिस अजय जायसवाल के नाम पर मनोज जायसवाल ने शराब का पूरा साम्राज्य खड़ा किया, उसे कोई जानता तक नहीं था। उसके पास इतना पैसा भी नहीं था कि वह अपना खर्चा चला पाता जबकि बरेली में ही हरुनगला के पास उसके नाम पर शराब का गोदाम था जिसकी लाइसेंस की फीस ही 20 लाख रुपये आबकारी विभाग को दी गई थी। लाखों रुपये का महीने की शराब बेचने से आय अलग थी। कानपुर और उन्नाव में भी उसके नाम शराब गोदाम थे। इन गोदामों से शराब निकालना और उसका पैसा जमा करना, यह सब मनोज खुद करता था।

15 हजार रुपये वेतन, पांच हजार चले जाते थे किराए में
टपरी डिस्टिलरी में एसआइटी के छापे के बाद जब अजय जायसवाल का नाम सामने आया तो मनोज ने उसे छिपा दिया। कर्मचारी नगर के पास साईं धर्मकांटे से कुछ दूर एक किराए के मकान में उसे ठहरवा दिया। मकान में नीचे प्लाईवुड की दुकान थी, ऊपरी हिस्से में अजय रहता था। उसके वेतन 15 हजार रुपये में से पांच हजार रुपये किराए में चले जाते थे।
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पत्नी ने नहीं की बात, बेटी से बात कर फूट-फूट कर रोया
गिरफ्तारी के बाद लखनऊ में एसटीएफ ने गिरफ्तारी की सूचना देने के लिए अजय की पत्नी रीता को फोन किया लेकिन रीता ने उससे बात करने से मना कर दिया। बोली, चार साल से जिस आदमी ने अपने पत्नी-बच्चों की सुध नहीं ली, उससे क्या बात करना। अगर वह चाहे तो अपनी बेटी से बात कर लें। इसके बाद एसटीएफ ने अजय की बड़ी बेटी से बात कराई। बेटी से बात करके अजय फूट-फूट कर रोया, अपनी गलती भी मानी। एसटीएफ को बताया कि पत्नी मकान अपने नाम कराना चाहती थी। उसे शक था कि वह मकान किसी दूसरे के नाम न कर दें। इसी पर विवाद हुआ तो दोनों अलग हो गए। मकान की दीवार पर विवादित मकान लिख दिया ताकि कोई उसे खरीद न सके।

आरोपी अजय जायसवाल

 

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