माहौल भांपकर पुलिस ने पहले ही तैयार कर लिया था कार्रवाई का खाका
मौलाना तौकीर रजा खां ने बीते साल प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 26 सितंबर को प्रदर्शन करने की बात कही थी। पुलिस-प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद भी 26 सितंबर को जुमे की नमाज के बाद शहर के विभिन्न स्थानों पर सिर तन से जुदा के नारे लगाकर माहौल खराब किया गया। पुलिस पर हमले किए गए।
बवाल के बाद पुलिस ने कोतवाली में सात रिपोर्ट दर्ज कीं, इनमें 50 आरोपी नामजद किए गए। इन मुकदमों की विवेचना में 259 आरोपियों के नाम प्रकाश में लाए गए। प्रेमनगर में एक रिपोर्ट दर्ज की गई, जिसमें 24 आरोपी नामजद कराए गए और 36 के नाम विवेचना के दौरान प्रकाश में आए। कैंट में दस आरोपियों को नामजद कराते हुए रिपोर्ट दर्ज की गई और विवेचना में 42 लोगों को चिह्नित कर आरोपी वनाया गया।
किला थाने में तीन लोगों के विरुद्ध नामजद रिपोर्ट दर्ज की गई, जबकि 31 को विवेचना के दौरान आरोपी बनाया गया। बारादरी में दो रिपोर्ट दर्ज की गईं, जिनमें 47 लोगों को नामजद किया गया था। इन दोनों मुकदमों की विवेचना में 111 को आरोपी बनाया गया। दो आरोपियों को मुठभेड़ में गिरफ्तार किया गया था। इस प्रकार पुलिस ने दंगे के मुख्य आरोपियों के नाम एक से अधिक मुकदमे में खोल दिए। इससे वे पुलिस की कार्रवाई में फंसकर रह गए। इनमें कई आरोपियों के नाम दर्ज हुए सभी 12 मुकदमों में खोले गए।
इस वजह से उन्हें जमानत नसीब नहीं हो पा रही है। दर्ज हुए 12 मुकदमों में से 11 की वादी खुद पुलिस है, इसलिए भी दंगे के आरोपी बच निकलने में असफल रहे। पुलिस ने जिन लोगों को नामजद किया और जिनके नाम विवेचना के दौरान खोले, उनमें से एक भी नाम गलत नहीं पाया गया। इस प्रकार पुलिस द्वारा आरोपी बनाने की कार्रवाई सौ प्रतिशत सही रही।