तत्कालीन एसपी सिटी ने की थी जांच
तत्कालीन एसपी सिटी राम बहादुर ने अपनी जांच रिपोर्ट में अमर उजाला में प्रकाशित खबर का हवाला देते हुए लिखा था कि तौकीर रजा खां व डॉ. नफीस सांप्रदायिक प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं। यदि इस संगठन पर नियंत्रण नहीं लगाया गया तो भविष्य में बरेली को गंभीर सांप्रदायिक स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। दो दशक पहले ही पुलिस को मालूम था कि शहर किस मुहाने पर खड़ा है।
आज घटना के एक साल बाद भले ही तौकीर रजा जेल में हों और प्रशासन अपनी पीठ थपथपा रहा हो, लेकिन सच यही है कि अगर 2006 की उस पुलिस रिपोर्ट पर समय रहते सख्त कदम उठाए गए होते तो बरेली को पिछले साल का वह खौफनाक दिन न देखना पड़ता।
अब जागे, कोर्ट तक पहुंचाएंगे पुराने दस्तावेज
दूसरी ओर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य का दावा है कि वर्ष 2025 में हुए बवाल के आरोपियों पर की गई कार्रवाई पुलिस की सक्रियता से संभव हुई। साजिश बड़ी थी, मगर समय रहते पुलिस ने उसको पहचान की और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई भी की। आरोपियों के खिलाफ कानूनी लड़ाई में पुरानी फाइलों को भी सबूत के तौर पर न्यायालय तक पहुंचाया जाएगा।