अजीत प्रताप सिंह। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की ताजा रिपोर्ट बरेली की महिलाओं के लिए सुखद नहीं है। इस रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ सालों में महिलाएं और ज्यादा मोटापे की शिकार होने लगी हैं। आरामपरस्ती के साथ चाट-मिठाई और फास्ट फूड के शौक को इसका प्रमुख कारण बताया गया है। पिछले सर्वे की तुलना में मोटापे की चपेट में आई महिलाओं की संख्या इस बार पांच प्रतिशत ज्यादा है।
ताजा रिपोर्ट पांचवें नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस- 5) पर आधारित है। एनएफएचएस-4 की रिपोर्ट साल 2015-16 में तैयार की गई थी। कोरोना की वजह से पांचवां सर्वे टलता रहा। लिहाजा पांचवीं रिपोर्ट 2019-21 यानी करीब दो साल के रैंडम सर्वे के आधार पर तैयार की गई है। इस रिपोर्ट में महिलाओं में न सिर्फ मोटापा बढ़ने का जिक्र है बल्कि मोटापे की वजह से उनमें बढ़ रही कई दूसरी घातक बीमारियों को भी इंगित किया गया है।
महिलाएं और मोटापा
25 फीसदी का बीएमआई ज्यादा
एनएफएचएस की ताजा रिपोर्ट की पुरानी रिपोर्टों से तुलना करें तो बरेली की 25.0 फीसदी महिलाओं का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) ज्यादा है।
07 प्रतिशत घटीं सामान्य महिलाएं
एनएफएचएस- 4 में वजन और लंबाई के सापेक्ष 25.4 फीसदी महिलाएं सामान्य मिली थीं मगर एनएफएचएस- 5 में घटकर 18.2 फीसदी रह गईं। हैं।
05 प्रतिशत में बढ़ गया मोटापा
एनएफएचएस- 4 में मोटे होने की श्रेणी में 20.9 फीसदी महिलाएं थीं। एनएफएचएस- 5 में मोटापे की शिकार महिलाओं की तादाद बढ़कर 25.0 फीसदी हो गई है।
52 फीसदी की फिगर भी बिगड़ी
एनएफएचएस- 5 की रिपोर्ट के मुताबिक 51.9 फीसदी महिलाओं में कमर से कूल्हे का अनुपात भी ज्यादा मिला है। एनएफएचएस- 5 में यह बिंदु शामिल नहीं था।
दस फीसदी महिलाओं में हाई रिस्क ब्लड शुगर
एनएफएचएस- 5 की रिपोर्ट के अनुसार रैंडम जांच में मोटापे से ग्रसित 9.7 फीसदी महिलाएं हाई रिस्क ब्लड शुगर से पीड़ित मिलीं। 3.6 फीसदी महिलाओं में ब्लड शुगर सामान्य से थोड़ा ज्यादा मिला लेकिन 5.4 फीसदी में गंभीर स्थिति में पाया गया। एनएफएचएस- 4 में ब्लड शुगर की जांच का बिंदु शामिल नहीं था।
गर्भवती से ज्यादा सामान्य महिलाएं एनिमिक
रिपोर्ट के अनुसार 15 से 49 वर्ष तक आयु की सामान्य महिलाओं में एनीमिया पीड़ित होने के केस बढ़े हैं। एनएफएचएस- 4 में 53.7 फीसदी एनिमिक थीं लेकिन एनएफएचएस- 5 की रिपोर्ट में यह आंकड़ा 61.3 फीसदी हो गया है। 18 से 49 वर्ष तक आयु की गर्भवती में एनीमिया कम हुआ है। एनएफएचएस- 4 में यह 57.2 फीसदी था जो अब 50.9 फीसदी दर्ज हुआ है। सबसे ज्यादा 15 से 19 वर्ष तक की 66.2 लड़कियां और 20 से 49 वर्ष तक की 60.8 फीसदी महिलाएं एनिमिक पाई गई हैं। एनएफएचएस- 4 में 59.9 फीसदी लड़कियां और 53.9 फीसदी महिलाएं एनिमिक मिली थीं।
और भी गंभीर रोगों से घिर सकती है जिंदगी
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. आरके गुप्ता के मुताबिक एनएफएचएस की रिपोर्ट का साफ इशारा है कि महिलाओं का खानपान बेहद असंतुलित और अव्यवस्थित है। पौष्टिक आहार का सेवन न करने से वे एनिमिक हो रही हैं। स्ट्रीट और पैक्ड फूड, रेस्त्रां, होटल का खाना खाने से शरीर में कैलोरी बढ़ रही है। शारीरिक श्रम लगातार कम होता जा रहा है। इस वजह से पहले मोटापा बढ़ा और अब वे ब्लड शुगर की चपेट मेें आ रही हैं। शुगर बढ़ने से भविष्य में महिलाएं और भी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकती हैं।