बरेली। रिश्वत खोरी मामले में पकड़े गए बाबू के खिलाफ चल रही जांच अब एक्सईएन तक पहुंच रही है। दो सदस्यीय जांच समिति अब एक्सईएन से जवाब-तलब करने की तैयारी में है। अधिकारियों की माने तो एक्सईएन ने पीड़ित की फरियाद को सुना या नहीं, जब सुना तो समाधान के आदेश किस तरह से दिए ऐसे ही सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे।
दो अगस्त को एंटी करप्शन की टीम ने 20 हजार की घूस लेते हुए विद्युत निगम के बाबू अजीत कुमार पांडेय को गिरफ्तार किया था। आरोपी के बैग से 1.76 लाख रुपये की बरामदगी भी हुई थी, जिसके खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कर उसे जेल भेजा गया था। इस पूरे मामले की शिकायत पीड़ित मीरगंज के गूला निवासी आभाष ने की थी। मुख्य अभियंता ज्ञान प्रकाश ने विभागीय जांच के लिए अधिशासी अभियंता धर्मराज सिंह और ओम प्रकाश सिंह को नियुक्त किया है, जिनकाे 15 दिन में रिपोर्ट देनी है।
दर्ज हुई एफआईआर में साफ हुआ कि पीड़ित तीन बार एक्सईएन के पास पहुंचा था। अब पीड़ित उपभोक्ता की शिकायत पर एक्सईएन ने कार्रवाई के निर्देश किस तरह से दिए थे, इस ओर जांच की सुई घूमी है। हालांकि शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि मामले में बिल संशोधन की बात सामने आते ही पीड़ित आभाष को सीधा बाबू के पास भेज दिया गया था। संवाद
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- पीड़ित के बयानों पर एक्सईएन की जांच की राह होगी तय
पीड़ित के बयानों पर एक्सईएन की जांच की राह तय होगी। दरअसल पीड़ित उपभोक्ता की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में एक्सईएन का जिक्र हुआ है, जिसके तहत ही इस पूरी जांच रिपोर्ट में विभागीय कार्रवाई हो रही है। अब जांच समिति इसमें जल्द बयान दर्ज कराएगी। जानकारी के मुताबिक, इसमें पीड़ित से एक्सईएन की भूमिका पर भी सवाल होंगे कि एक्सईएन ने शिकायत सुनी या नहीं, सुनने के बाद बाबू को बुलाया या फोन पर दिशा-निर्देश दिए। वहीं, लिखित शिकायती पत्र दिया था तो उस पर एक्सईएन ने क्या दिशा-निर्देश दिए।
उपभोक्ता के कार्यालय आने पर अधिकारी सबसे पहले खुद संज्ञान लेकर संबंधितों को दिशा-निर्देश देते हैं। इस मामले में एक्सईएन की ओर से क्या कार्रवाई हुई, किस तरह और किस स्तर पर की गई है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
- ज्ञान प्रकाश, मुख्य अभियंता