बरेली। रबर फैक्टरी में कई महीनों से ठिकाना बनाकर रह रही बाघिन ने खतरा भांप लिया है। तीन दिन बाद भी वह ट्रैंक्युलाइज एक्सपर्ट्स की गन के निशाने पर आना तो दूर यहां लगाए गए कैमरों तक की पकड़ में नहीं आ रही है। वन विभाग के अफसरों ने अनुमान जताया था कि विशेषज्ञों की टीम अधिकतम 72 घंटे में उसे ट्रेस करने के बाद ट्रेंक्युलाइज कर लेगी लेकिन अब वे एकाएक बाघिन के गायब हो जाने पर हैरान हैं। अफसरों का कहना है कि युवा बाघिन काफी चालाकी से काम कर रही है। पिछले 48 घंटे में वह सिर्फ एक बार ही कैमरे में दिखाई दी है।
मुख्य वन संरक्षक ललित वर्मा के मुताबिक बाघिन को ट्रैप करने के लिए पहले दो जीएसएम वायरलेस कैमरे लगाए गए थे। 22 कैमरे पहले भी लगाए जा चुके हैं। वायरलेस कैमरा उस इलाके में लगाया गया था जहां पिछले दिनों बाघिन लगातार चहलकदमी कर रही थी। उम्मीद थी कि वायरलेस कैमरे की रेंज में आने पर जैसे अलार्म बजेगा, उसे ट्रैंक्युलाइज कर लिया जाएगा लेकिन अब तक एक बार भी वह वायरलेस कैमरे में ट्रैप नहीं हो सकी है। अब आठ वायरलेस कैमरे और बढ़ाए गए हैं। दस वायरलेस कैमरे लगने के बाद उम्मीद है कि वह किसी न किसी कैमरे में जरूर ट्रैप होगी। उन्होंने बताया कि बाघिन युवा है और पकड़ में आने से बचने के लिए बेहद चालाकी से काम कर रही है। कैमरे के सामने आने के बजाय उसके पीछे से होकर गुजर रही है। उसकी यह चालाकी स्टिल कैमरे में शुक्रवार रात ढाई बजे रिकॉर्ड हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कि अगले 40 घंटे में बाघिन को रेस्क्यु किया जा सकता है।
कोयला प्लांट के पास दिखे पगमार्क
फतेहगंज पश्चिमी। बाघिन ने चौथे दिन भी पुरानी जगह पर बांधे गए पड्डे का शिकार नही किया। यहां लगातार डेरा डालकर बाघिन का इंतजार कर रहे विशेषज्ञ भी इससे मायूस हो गए। कैमरे की फुटेज से पता चल रहा है कि बाघिन इस जगह आई तो लेकिन खतरा भांपकर लौट गई। पास ही कोयला प्लांट में मंदिर के पास उसके पगमार्क मिले हैं जिससे विशेषज्ञ यह भी अंदाजा लगा रहे हैं कि बाघिन अब अपना इलाका बदलने की फिराक में है।
आई मगर शिकार को दूर से ही देखकर लौट गई
विशेषज्ञों के मुताबिक उनकी टीम शनिवार को पूरे दिन बाघिन के पड्डे को शिकार बनाने के लिए आने का इंतजार करती रही लेकिन वह अचानक तालाब के पास बांधे गए शिकार के पास से गुजरकर निकल गई। अब मंदिर के पास उसके ताजा पगमार्क मिल रहे हैं। यह वही इलाका है जहां करीब महीने भर पहले बाघिन की चहलकदमी के प्रमाण मिले थे। डीएफओ भरतलाल के मुताबिक बाघिन अगर शिकार पर हमला करती तो उसे ट्रेंक्यूलाइज किया जा सकता था।